रोशनी की तलाश में | Roshani Ki Talash Me

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Roshani Ki Talash Me by विष्णु दत्त - Vishnu Datt

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पनोली की तलाश मैं हर ग्रन्धेरा फक शहूर परः सूरज भाग गया लोग रोदनी तलाशते. जिनको श्रादत है खिड़कियों के प्रकाश में जीने के चुपकर बेठ जाते मु लॉक सुबह की प्रतीक्षा में. खिड़की तोड़ ला सके प्रकाश (न सोचते सो नाते ति | प्रन्धेरे में ग्रारक्षित ‰ खड़की की रात सूरज उल्टेमुह लने की सोचते. ` ` रात में सूरज नहीं श्राता डर ध प्रकाश लाने न यु शीशे तोड़ने होंगे से, क याऐसेही ` गः नपुसक चांदनीमें जीनाहोगा. ` '




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