अभिधम्मत्थसंगहो भाग - 2 | Abhidhammatthasangaho Bhag - 2

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Abhidhammatthasangaho Bhag - 2 by रामशंकर त्रिपाठी - Ramshankar Tripathi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कामासव $ ४ ७३३ भवासव ००० ००५ ७३३ - दुष्टि-आसवं पिन क ७३४ अविद्यासव ०७४ ००१ ७३४ ओघं (४) ४५6 ज ७३४ योगं (४) न {कन ७३५ घर्म॑स्व॑रूप ५.३ धिः ७३१५ ग्रन्थ (४) ज + ७३६० अभिध्या ह न ७३७ व्यापाद न ४ ७३७ दीलब्रतपरामशां त ५५ ७३७ इदंसत्याभिनिवेश कि ह ७३६ उपादान (४) विगत स ७४० आत्मवादोपादान कि. ५; ७४० परमात्मा ४ के ७४१ जीवात्मा क ह) ७४२ नीढरण (६) (क क , ७४४ दो घर्मों का एक नीवरणत्व* ९१२. + ७४४ अनुशय (७) ग क ७४५ अनुदाय का काल भं १ ७४८ संयोजन (१०) र. त ७४६९ स्व॑प ' 5 ७५१ योग-ग्रन्थ-संयोजन च कः ७५२ क्लेश (१०) कक बा ७५२ १५०० क्लेश „` क ५6 ७५३ मिभकलश्ग्रह र 6 ५ ७५५ हेतु (६) नह भा ७१५५ घ्यानाङ्गं (७) | ८9 ७५५ मार्गाद्ध (१२) भर व ७५७ सम्यग्‌ दृष्टि ओर उसके भेद पक क ७५७ सम्यक्‌ सङ्कल्प भौर उसके मेद भ कक ७५८ मिथ्या सखुल्प न कर ७५६ इन्द्ियाँ (२२) फल किक ७५९ प्रञेन्दरिय ० जीव ००० ७६० अनाज्ञातमाज्ञास्यामीन्धिय {द ए ७६१भाजिन्द्रिय क अ ५ ७६१




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