जैन धर्म का परिचय | Jain Dharm ka Parichay

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Jain Dharm ka Parichay by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ९५ ) श्रकार खप्त- तच्वौका स्वरूप कषा । च्व व्याख्यान का तीस्तय माग उपदरेणक्ा क्रंम है सो कद्दा जाता हें । उपद्ष्टा का क्स सस्यग्दश्न सम्यग्न्ञान सौर समस्यच्छचारिच.ये तीनो मि = अमद अ. € कर €




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