षट्खंडागम | Satkhandagam

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(४ )विषय प्रष्ठ जघन्य श्रायुवेदनाका अल्पबहुस्व ३८ जघन्य नामवेद्नाक्रा अत्पबहुस्व ३६ जघन्य गोन्रवदनाका अस्पवरहूुप्व ३६ जघन्य वेदनीयवेदनाका अस्पब्रहुस्व ३६ उत्कृष्ट आयुवेदनाका अटुपबहुत्व ३६ उत्कृष्ट दो आचरण चौर श्नन्तरायवेदनाका अस्पवदहुरव २६ उत्कृष्ट मोह नीयवंद नाका अल्पबडुत्व ३६ उत्कृष्ट नाम और गोत्रवेदनाका अलपबहुत्व ३६ उत्कृष्ट बेदनीय वेद नाका 'अल्पबहुत्व ४०उत्तर प्रकृतियों की अपेक्षा झटपबहुत्व ४० सातावेदनीय आदि प्रकृतियों का अट्पबहुत्व ४० आठ कपाय च्रादि प्रकृतियांका अस्पवहुत्व ४२ अयशःकीति श्रादि प्रकृतियों का अटपबहुत्व ४४चौंसठ पदवाला उत्कूप्ट महादण्डक ४४ उत्तर प्रकृतियोँका स्वस्थान उत्कृष्टअल्पबहुत्व ६० तीन गाथादओं द्वारा संज्वलन चतुप्क आदि प्रकृत्तियों का 'झरपबहुत्व ६५ चौसठ पद वाला जघन्य महादण्डक ६५ उत्तरप्रक्तियोंका स्वस्थान जघन्यश्म ल्पबहुस ५५ प्रथम चूलिका ७८-८७ दो सूत्र गाथाओंद्वारा गुणश्रणि निर्जराफेग्यारह स्थान और काल ७८ अलग अलग सूत्रों द्वारा गुणश्रणिनिर्जराका विचार =9 अलग अलग सूत्रों दवार। गुणश्रेणि निजराक करालका विचार ८५ द्वितीय चूलिका ८७-२४० अनुभागवन्धाध्यवसानस्थानमं १२ अनु- यागद्वारोंकी सूचना = बारह श्चतुयोगद्रारोके नाम व उनकीसाथकता ममविषयएक एक स्थानम कितने चच्रविभागप्रति- च्छेद होते हैंअनुभागका विशेष खुलासा अधिभागप्रतिच्छेदका स्पष्टीकरण द्रब्यार्थिकनयकी अपेक्षा जवन्य स्थानमें अधिभाग प्रतिच्छंदोंका विचारवर्गका संहृष्रिपूवक विचारबर्गणाविचारस्पधेकविचारसअविभागप्रतिच्छेदकी त्रिविध प्ररूपणाकी प्रतिज्ञावर्गणाप्रहूपणाके तीन प्रकार व उनका विवचनस्पधेक प्ररूपणाकरे तीन प्रकार च उनका विवचनअन्तरप्ररूपणाके तीन प्रकार व उनका विवेचनपरमाणुझोंमें अधिभागप्रतिच्छेदोंका आरापकर जघन्य स्थानमें प्रदेशप्ररूपणा प्रदेशप्ररूपणामें छह अनुयागद्वारोंके नाम च संदृष्टिपूवक उनका विवचन करनेकी प्रतिज्ञाप्ररूपणाप्रमाणश्रेणिप्ररूपणाके दो भेद व उनका विचार अवहारविंचारभागाभागका अवद्दारक समान जाननेकी सूचनाअत्पबहुत्वथिचारस्थानप्ररूपणास्थानपद्की व्याख्यास्थानक दा सेद्‌ व उनका लक्षणपू्ैक विशेष विचारअन्तरप्ररूग्णाअन्तरप्ररूपण।की साथेकतास्थानान्तरका स्वरूप६१ ६१ हरे६२ ६२ ६५ ६६६६१०११०१ १५१ १५२ १०२ १८४५६० ११८ १११ ११११११ ११४ ११४ ११४




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