श्री स्थानांग - सूत्रम् भाग - 2 | Shri Sthanang Sutram Bhag - 2

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Book Image : श्री स्थानांग - सूत्रम् भाग - 2 - Shri Sthanang Sutram Bhag - 2

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्री स्थानांग सुत्रम्‌ >> पंचम स्थान : सूत्र संख्या-89 न कक पंचम स्थान : प्रथम उद्देशक महाव्रत ओर अणुतव्रत 21 | कलह ओर शान्ति क कारण 67 अणुव्रत 25 | पाच आसन ओर आर्जव स्थान १] काम-गुण ओर आसक्ति आदि के स्थान 26 | पञ्चविध देव 74 काम-गुण-- 28 | पञ्चविध परिचारणा 76 दुर्गति ओर सुगति मे जाने के कारण 30 | असुरेन्द्र चमर कौ पाच महारानिया 77 प्रतिमा- भेद 31 | इन्द्रो कौ पचविध सनाए 78 क्षुल्लिका सर्वतोभद्रा 32 | शक्रन्द्र ओर ईशानैन्द्र पार्षद देव दृवियो महतीभद्रा प्रतिमा 32 | कौ स्थिति 84 भद्दुत्तरा प्रतिमा 33 | प्रतिघात भद 85 महती भद्रात्तरा प्रतिमा 33 | पञ्चविध आजीविक 87 स्थावरकाय-भेद 33 | पचविध राज- चिन्ह 89 अवधि-दर्शन के सक्षोभ कं कारण 35 | छदयस्थ परीषह उपसर्गा को क्यो केवलज्ञान-दर्शन की अक्षांभता के कारण 39 | सहन करे? 91 पांच शरीरो के वर्ण -रस आदि 41 | कवली द्वारा परीषह-सहन के कारण 95 दुर्गम, सुगम ओर अभ्यनुज्ञात स्थान 44 | पाच हेतु, पाच अहेतु ओर पांच केवली महानिर्जरा ओर महापर्यवसान के कारण 60 अनुत्तर 99 विसाभोगिकता ओर पाराञ्चित प्रायश्चित्त 63 | अरिहन्तो के कल्याणक -नक्षत्र 103 श्री स्थानाद्ग सूम्‌ > स्थानाद् सूत्रम्‌ ००००० 10 ००००० ^“ अनुक्रमणिका




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