गाँधी- गौरव | Gandhi Gaurav

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
641 KB
कुल पष्ठ :
122
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)दूसरा सर्ग
टशणा दद्दों के थे दढ़े रणयीर निज प्र के घनी
दीवाम उत्तमचद उनके कुराख, प्रमु-सेयक्, गुमी।
पर, स्वाभिमान कमो न सेषा पर मिक्वावर था किया
मा करमचंद सुपत्र ने सी तात का हो पप लिया।भहनम स्मर्वे्र स्वमाव भी प्रमु का न अंधा मक्त था
करना पड़ा सिर पदपि नगर परिस्पक्त था ।
मिक सनकी सुपत्नी पिरत ,थी नित्य्म निनाश्ष्वी सब नियमपूर्वकं सुता ।६ चननी इमारे चरितनायरु की षदी गर्वं पी
आदर्श सया र्मम् कौ सस कीतिं पिय ।
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मोविर्मयी पौ जम्मठिभि मोहन महारमा शी मा ।# ॥परसुदरित प्रभाकर की कका थी विमक्ष नम में छा रही
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