हाथ की उँगलियाँ | Hath Ki Ungliyan

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Book Image : हाथ की उँगलियाँ  - Hath Ki Ungliyan
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ग्यारहमाना कि पजेसहला नहीं फातेकिसी हिलती-डुलती नरम-नरम देह कोपर कितनी अजीब बात है कि किसी नरम-नरम देह के गरम-गरम खून से कितनी आसानी सेसान लेते हैंअपने नाखूनवेबारहउँगलियाँजब बहाती हैं पसीना खाती हैं मौसम की मार तब कही उगा पाती हैं फसलपर लहलहाती इन फसलों को महज 'घास-पात ही खर-पतवार हीक्यों समझते हैं खुर ?आखिर क्यो ?हाथ की 'सँगलियाँ 15तेरहखुर मचलते नही सुरो पर,चहकते नहीं लयो पर, थिरकते नहीं तालो परपर दिखा नहीं चारा कि मचलने लगते हैं वे 'चहकने लगते हैं दे थिरकने.: लगते हैं वेकभी-कभीइस सीमा तक कि तुडा लेते हैं पंगहा




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