हाथ की उँगलियाँ | Hath Ki Ungliyan
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutSuresh Chandra Srivastava
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1.68 MB
कुल पष्ठ :
85
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about सुरेशचन्द्र श्रीवास्तव - Suresh Chandra Srivastava
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ग्यारह
माना कि पजे
सहला नहीं फाते
किसी हिलती-डुलती
नरम-नरम देह को
पर कितनी अजीब बात है
कि किसी नरम-नरम देह के
गरम-गरम खून से
कितनी आसानी से
सान लेते हैं
अपने नाखून
वे
बारह
उँगलियाँ
जब बहाती हैं पसीना
खाती हैं मौसम की मार
तब कही उगा पाती हैं
फसल
पर लहलहाती इन फसलों को
महज 'घास-पात ही
खर-पतवार ही
क्यों समझते हैं खुर ?
आखिर क्यो ?
हाथ की 'सँगलियाँ 15
तेरह
खुर मचलते नही
सुरो पर,
चहकते नहीं
लयो पर,
थिरकते नहीं
तालो पर
पर दिखा नहीं चारा
कि मचलने लगते हैं वे
'चहकने लगते हैं दे
थिरकने.: लगते हैं वे
कभी-कभी
इस सीमा तक
कि तुडा लेते हैं
पंगहा
User Reviews
No Reviews | Add Yours...