श्री भगवतीसूत्रम | Shree Bhagavati Suttra Par Vyakhayan Part-iv

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : श्री भगवतीसूत्रम - Shree Bhagavati Suttra Par Vyakhayan Part-iv

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
१ ११३५] ` =, यी, ४, @ कैरी #, ® [५१ ॐ, हा र (१ नि गने ˆ यह. ˆ र वाहैक्कि हेर र । गत दे ~ ^ कि „दय पटत ठ रताः! .योद्य गे भिर दहे। भी. “दे भीहदोतादटे दी ` प्रण रे हाउस मय गर योदये यतो ण. शर तिदह! ' ~ . | जव शीत जायश्रौर `टी-बडा 1 जे दि गई © देने भ, तव दा ' तादे ^ ये तप रददा दे।' इ व >+ नाम तपति: ह. मलेष्ा य मर्ड तर द पड्तादहा, शी ५; भ परन्त छोटी-छाटी चीजें अगर दि इ देती हो, तब यद्द कहा क जाता दे सय तप रहा दे । तात्पय यद्द गर्मी, प्रभाव से जब सूर्य दीं को नष्ट र देता दे तथा वारः ` री वस्तुपेमी न रप्ड्ने ग^ है, तव॒ य । तैंपना ट 1 हे। य छ ह 1 वमान्य-वि पे घर्म दि गया गयादहै। सये कई प्रकाश रता है, इस म्बन में” गेतिम क्त्र ४ ५ न स्वामी त्र लिए प्रश्न किया हे । का गौतम स्वामी के प्रश्न के उत्तर मे भगवान्‌ ने. _ माया था -सृय, क्षेत्र को रुपशे कर ' प्रका करता हे, बिना प्रकाश किये न्दी 1 इ उत्तर पर यह जिनज्ञा हयो तीहि सूय ता ऊपर हे, र वह प्रका त होने दाले जअ 1 स्पशे कि. प र कर्ता ? इस 1 माघान यद्द दा सूयन “नहीं अाता, यह त्य हे, परन्त उल्लकी रणे ` पर तोनी ता.ष्ीहेः). स्ये; र, पर पकाशः यह तीनों बंधा [९ कि भिन्न-भिन्न चस्तुएं नहीं दें ।. धर सूर्य प्र शिमय न दोता तो हु > क. & न ¢,




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now