नीर क्षीर | Neer Ksheer

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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वे राजनीति के भीडे हैं / 17दीजिए, चौक पर खड़ा कर दीजिए, पान ठेसे पर यडा कर दीजिए--वे सिद्ध बर देंगे कि वे केवल वो हैं 1इस बार जिन कीडो बा मैं जिक्र कर रहा हूं, वे स्पेशल वेरायटी वाले बोडे हैं। उनगा बोडरव तभी जापुत होता है जब देश में घोई बहुत खड़ी पटना हाती है । जहौ तक मुझे याद भा रहा है, फेयरफेबम ओर बोफोर्स मे दिनों मे उनवा बीडापन इतना जागृत हो गया था कि उठाने नगर वा एक-एक आदमी छाँट कर शुदठरा था । उनके सीभाग्य से फिर “राष्ट्रपति चुनाव आ गए । वस उसी दिन से उनभी बीडागति इतनी तेज हो गई है कि कड्रोल में नहीं आ रही है । कुछ कढ्राल में आने को होती है. वि कोई न कोई इस्तीफा दे देता है। अब आप ही बताइए, मे कड नही “रहेंगे तो बया वरेंगे 1जिस टिन विद्याचरण, आरिफ माहम्मद और अरुण नेहरू को 'राजीवजी ने हटाया, उसी दिन वे हमारे पास आए। बोले--आपको एक राज की बात बताना हूँ । मेरा तजुर्वा कहता है कि यह मिलीमगत है ।क्से?यह ती आपस में पहले से तय था । राजीवजी ने पहले इन लागो था वह दिया था दि आप लोगो को हटाऊँगा लेक्नि आप चिंता विल्पुल मत करना ।-एेसा क्यो बहा था राजीवजी ने *“गो इतना नहीं समझे, भई राजीवजी को पता लगाना है कि उनके 'विरोध में कितने लोग हैं जो असतुप्ट हैं । जैसे ही ये लोग अलग होंगे, सभी असतुप्ट इनके साथ हा जायेंगे । देखना ठीन दिनो में वे चहें फिर मे अपने साथ शामिल कर लेंगे ।अब पूरे शहर मे हवा फैल गई। मे हर जगह जति भौर भने रान नीतिर ज्ञान का परिचय देते ।तीन दिन बीत गए त्तव मैंने उ हैं घेरा । इघर विद्याचरण की लड़ाई खुल कर सामने आ गई थी । मुझे तो विघटन के भातार नजर था रहे थे ! इसी बीच अ्जिताभ बच्चन के खिलाफ जाँच के आदंश भी हो गए ब्और अमिताभ ने लोकसभा मी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया ।




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