अध्यात्म - प्रबोध अपरनाम देशनासार | Adhyatm - Prabodh Aparanam Deshanasar
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
241
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)# 32० नमस्सिद्धमू ०
-गणिवर्य श्रीमद् देवचन्द्रजी महाराज विरचितअध्यात्म-प्रनोधअपरनाम| देशनासार(स्वोपशवृत्तियुत 2
प्रणम्य श्रीमहावीर सिद्धार्थकुलभास्करम् ।
दुरवादिद्विपविद्धसकरणे पञ्चानमोपमम् ।१।
अनेकान्तानन्तगुणं भिर्वाध॑ 'पारिणामिकम् ।
'वस्तुतत्वमनादीनं -स्वात्मघर्ममह श्रये ।२।
श्रीदीपचनद्र पाठक चरणाम्बुजसेवनाच्च यल्लच्यम् ।
गणधर रचित -ूत्र तदनुसारेण वक्ष्यामि 1३।
'स्वात्मोपकृतिहेतो यथार्थ सद्घर्मदेशनामूलम् ।
'ससारार्णवत्तार करोम्यह देशनासारम् । ४1
अर्ध-सिद्धार्थनृपति के कुल को प्रकाशित कदने वाले सूय, ओर
विभिन्न मतो को अभिनिवेश रखे से कुुक्तियो व कुतकों से वाद कलने
चाले, दुवदिरूप गजो को विर्वसं कले के लिए सिह-तुल्य चरम
तर्णङ्कर भगवान् महावीर प्रभ को नमस्कार करके अनेकान्तस्वरूप
अनन्तगुणमय बाधारहितं पारिणामिक आत्मा मे ही परिगत रहने वाला
अत्मा का अनदिकालीन वास्तविक तत्वरूप अपने आत्म-पर्म का मै
आश्रय लेता हूँ 1
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