मेरा जीवन संग्राम | Mera Jeevan Sangram

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Book Image : मेरा जीवन संग्राम  - Mera Jeevan Sangram
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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-मेरा जीवन-संम्रास-- १३रूपमे परिवत्तिंत होनेके लिये वाध्य किया उसी समयसे मेरा उदेश्य मपनी जमंन-अस्ट्रिन मातृसूमिकी सेवा करते हुए अस्ट्रिन-राज- बंशका विनाश करना हो गया है ।हमारे परिवारकी आर्थिक दशा अत्यन्त खराब थी । दुर्भाग्यसे खाने कमानेकी समस्या कुप्तमयमें आ पड़ी । मुझे स्वप्नमें सी आशा नहीं थी कि मेरे सिरपर यह बला इतनी कम उम्रमें मा पढ़ेगी । ठोक ऐसे ही समय मेरी माता रोगग्रस्त हो गई' । पिता पहले दी मर चुके थे । अनाथ होनेक्े कारण सुके जितनी पेल्सन मिलती थी वद्द एक परिवारके भरण-पोपणके छिये यधेष्ट ल थी । ऐसी अवस्था ममे किकर्सव्य विमूट हो गया।. परिस्थितियोंने मुझे अपनी जीविका उपाजन करनेका मादेश दिया ।अन्तमें माशाओंसि प्रेरित हो कपड़ों मौर कटपीसकी एक पेटीरे वियेनाके लिये रवाना हुआ। अपने पिताकी तरह सुभे भो इसी न्यापारमें अपना भाग्य आजमानेका मौका मिठा । सें कुछ बनना चाहता था। सेरी इच्छा दुनियांमें झुछ कर दिखानेकी थी । परन्तु किसी भी हाठतमें नौकरी करनेकी नहीं ।




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