एकोन्तरशती देवनागिरी लिपि में | Ekontarashati Devanagiri Lipi Men

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
शेयर जरूर करें
Ekontarashati Devanagiri Lipi Men  by रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur

एक विचार :

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
१७पहले की लिखी हुई है । इस बात से यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि उनकी रचनाओं का चुनाव करना इतना कठिन क्यों है। ' वास्तव में साहित्यिक रचनाओं का संग्रह तैयार करना बराबर ही मुश्किल होता है। कोई भी संग्रह्‌ संकलनकर्ता के अपने ही विचारों और रुचि के अनुसार होता है और ऐसी आशा कोई भी नहीं कर सफ़ता कि उसकी पसन्द सबको संतुष्ट करेगी । यही कारण है कि कौई भी संग्रह हमें पूरा संतोष नहीं दे पाता। अगर गद्य के किए यह वात सत्य हो तो काव्य के लिए तो यह और भी अधिक सत्य है । [भिन्न-भिन्न पाठकों की सिन्न-सिन्न रुचि होती है। इसके अलावा किसी कविता का आवेदन पाठक के अपने निजी अनुभवं तथा मनो- ' दशा पर भी निर्भर करता है! कोई एक ही कविता अगर किसी / पाठक के हृदय को छू लेती है तो दूसरे पाठक को बिलकुल निरुत्साह्‌ :; छोड़ जाती है। यहाँ तक कि एक ही पाठक भिन्न-भिन्न काल में तथा . मन की भिन्न-भिन्न स्थितियों में अलग-अलग ढंग से प्रभावित होता ` है। चाहे चुनाव कितनी भी बुद्धिमत्ता से क्यों न किया गया हो और संकलनकर्ता कितना भी विवेकशील क्यों न हो, यह असंभव-सा ही है कि कोई ऐसा संग्रह निकरे जो सदा-सर्वैदा सभी पाठकों को सन्तुष्ट कर सके । ५ रवीन्द्रनाथ की रचनाओं का परिमाण, विस्तार ओौर वैचित्य एक ओर तो चुनाव के काम को कठिन बना देते हैं तो दूसरी ओर चुनाव को और भी आवश्यक बना देते ह । महान-से-महान कवि भी सब समय अन्तःप्ररणा कं रिखर पर नहीं रह सकता! समय- समय पर उसे भी भारमुक्त होना पड़ता है ओर कभी-कभी तो उसे घाटी में भी उत्तर आना पडता है। औसत पाठक को न समय मिलता है और न उसमें वैसी प्रवृत्ति ही होती है कि वह महांन साहित्यकार की सभी रचनाओं को पढ़ने का कष्ट उठा, उसकी सर्वोत्कृष्ट कृति को खोज निकाले और उसका आनंद ले । विदेशी पाठकों के बीच रवीन्द्रनाथकी ख्याति को कुछ धक्का लगा है, क्योंकि मुख्य रूप से उनकी रचनाओं ख




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :