औषधि विज्ञान शास्त्र | Aooshdhi Vigyan Shastra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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चिषयपष्ठ८अन्यान्य भौतिक गुण और उनकेपरिचायक साधनश्५१कर्मोनुरूप गुण र्प्पगुण और मायुवेद इनका प्रयोजन १५७गुण के स्थान १५९, गुरु गुण ११ लघु १६२, शीत गुण के कमें १६२ उष्ण गण थ उसकी क्रिया १६४ स्निग्ध गुण १६६ रूक्ष गुण, १६७ रलदण गुण १६८ खर-ककंश.. स्थिर गुण १६९ सर गुण १७० विशद १७१ पिच्छिल गुण १७९ स्थूल १७३ सुक्ष्म-तीक्षण गुण श्७४ मन्द, सान्द्र व शुष्क गुण १७६ द्रव १७७ कठिन १७८ मु १७९ वीर्य विज्ञान १८० गुण वीयेवाद १८४ सुश्रुत व वीर्य निरुपण १८७ कर्म लक्षण वी (नागार्जुन) १८९ नागार्जुन का कमें वीयंवाद १९१ उपलब्धि प्रकार १९५ वीर्य॑ निर्धारण १९६ सामान्य वीर्यें द्रव्यो में चीर्या- धानाथें विद्षेष उपक्रम. १९७ विपाक बिज्ञानभ्‌ १९९ विपाक-प्रकार २०३ षड्विच विपाक, युक्ति, समीक्षा र्‌०४ अनियत विपाक वाद २०५नविषयरदपष्ठत्रिविघ एव द्विविध विपाक २०७ काल के अनुसार गुण-रसके दृष्टि से शप्द अवस्थापाक २०९ मधुर-अम्ल-कटुकाख्य भाव २१०निष्ठापाक २१५ रस और उनकी क्रिया २२३ मधुर रस का परिणमन २३४प्रभाव विज्ञान परिभाषा समीक्षा २२७प्रभाव प्रधान्य २३०अप्टाग सग्रह के आधार पर २३१औषधि चिकित्सा क्योकरना चाहिए २३३ भाग ३आषधि दास्त्र का परिभाषा खण्डमगलाचरण शोधत-विशोघन-सशोधन -अवसादन-सनमन-प्रदमन -दामन-दोषप्रशमन-स्यदनम्‌ २३८ सग्राही-ग्राही-विरजनीय - रजन-लेखन-विलेखन-अन्‌ लोमन-कोपन-दूपण-प्रसा- दन-निग्रहण-शोषण-भेदन २३९ क्लेदन-प्रवलेदन - स्थापन- प्रबोधन - तर्पण -प्रवर्त्तन- करकृतमादंवक़ृत - जनन-बलप्रद- आपादन-पाचन-वर्घेन--उप चयकृत-विच्छेदन-वोधन - नादनकर्षण-अपकर्षण - घाती - विदाही-प्रद्ञादन वद्ध-भेदन -ईरण-आपह-ध्न हर विशेष सज्ञायें२३७२४०रहरे २४ रे




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