नेताजी सुभाष के विशेष पत्र | Neta Ji Shubhash Ke Vishesh Patr

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
150
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)किए बिना दिश्व-सम्यता वास्तविक उन्मेष नही पा सकती ! केवत
यही नहीं, विज्ञान, कला,साहित्य,ब्यवसाय-वाणिज्य इन सब दिशाओं
में भी हमारा राष्ट्र विश्व को कुछ देगा और सिखायेगा । इसीलिए
भारत के मनौधियों ने अन्घकारपूर्ण युगो में भी अपलक भारत का
शानप्रदीप जलाए रखा । हम उन्ही की सन्तान हैं । अपना राष्ट्रीय
लदय प्राप्त किए विना म मर सक्ते हैं।
मनुष्य-देह पंच भूत में मिल जाने प्रर भी जीवात्मा कभौ नहीं
मरती । उसी प्रकार एक राष्ट्र के मर जाने पर भी उसकी शिक्षा-
ही तब उसकी का्यं-सूची बन जाती दै मौर सोक-लीकं षदन
ही एकमात्र नीति है। इम दशा में कोई-कोई राष्ट्र बचा रता है,
यदि उसके अस्तित्व की साधंकता रही तो ।
मृत्यु और जागरण के अन्तराव-
सम्बनसे ५ कारण उसरा एक मिशन रहा है--भारतीय
सफ्यता था एक उद्देश्य है जो बाज भी सफल नहीं हुडा है। -
भारत दे इस मिशन में जिसकी बास्या है बह भारतवासी ही
मसाज जीवित है न वि वे सैतीस बोटि सोग जो बेदल जिन्दा रहते
षष
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