अथ पारसभागप्रारम्भ | ath parasbhag prarambh

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ath parasbhag prarambh  by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ट । तेसाही प्रकट होजाताहै जिसका हृदय निर्मल है सो चहभी प्रत्यक्ष होतांहे इसी पर, महाराज ने भी कहांहे कि जिसका हृदय शुद्ध है उसही को भगवन्तकी ओर मार्ग खुलंताहे कीहेते कि श्रादि उत्पत्ति बिषे इस मनुष्य का हृदय लोहे की नाई दोताहे सो तिसफो विधिसंघुक् जब मर्दन करिये तब दपैणुबत्‌ निर्मल होजाता है मर सषेपदयं को लतापतारै ओर नव उसको मदन न करिये तब ऐसा मलिन होजाताहै कि उस बिषे कुछ निर्मल ताई भासती नहीं चर किमी पदाथ को भी नहीं, जसाता इसीपर महाराज का वचनहै कि निस्तन्देह में तुम्हारे हृदय की ओर देखता हूं और जैसी करतूति. ठुम करतेहो सो तिनकी ओरभी देखताहूं ॥ ः सातवां संग ॥ + त पुदैपक्ष का चीन ।| ताते जानें कि जवततृ इस प्रकार प्रश्न को.किं जो इस मनुष्य बिषे पशुषों, धिह, मूत ओर देवते के स्वभाव प्रकट हैं सो तो में समका पर इस प्रकार हुम क्योंकरिर 'कहतेहो कि यह मनुष्य दिव्यरत्र है और कारण इसकी निर्मण है भर इसका अपना स्वभाव भी शुद्र है “और अपर सबही-परस्वभाव है सो इस वात्ाकों क्योंकर समकावे कि इस मरुष्य को भगवस्त के निर्मल स्त्रभाव के प्राषहोने निमित्त दी पेदाकियाहै काहेते फि यह चार प्रकार के स्वभाव हैं और इसे महुष्य बिषे इकट्रेहये. उपजे है ताते निर्मल समाव इसका क्योकःर अपना हमा आर अपर स्वभाव परस्वभाव किसकारण कहेगये सो तिसका उत्तर यह है. कि इस मनुष्यको भगवन्तने पशुओं और बिंदास विशेष उत्पन्न किया है और सं पदार्थों की बढ़ाई और पूर्णताईं भी भिन्न ९ है ओर जिस पदाथ की जो बडाई होती है सो वोही तिसका कारण कहाजाताहे जेसे गरदभते घोडा विशेषै कहि है कि ग्देभकों वोक-उठावने के निमित्त बनाया हे थर घोडे को इस निमित्त उत्पन्नकिया कि उसका दौड़ना भौर चलना सवार की अक्नातुभार हो मोर लड़ाई में सावधान होने एनः घोडा आरट गर्हम की नां बोमा उने का ब्त भी रखता है और दोड़ने और संग्राम में सावधानता की बढ़ाई अधिक दीनी हे फिजो गरैमविषे नहीं पाई जाती पर जब घोड़ा श्रपनी बड़ाई ओर पृर्णुततांते हीन होताहे तथ यरा उशवने का अधिकारी रहताहै मर गर्हम फे पदको पाता है और उसकी,अपनी बड़ाई नष्ट होजातीहे तैसेही जिन पुरुरेने इसे पकारं सममा | १५




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