धर्मवर्द्धन ग्रंथावली | Dharmvardhan Granthavali

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : धर्मवर्द्धन ग्रंथावली  - Dharmvardhan Granthavali
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अगरचन्द्र नाहटा - Agarchandra Nahta

Add Infomation AboutAgarchandra Nahta

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
( ३ )श्री अगर चंद नाहटा ने अपने “राजस्थानी साहित्य और संन कवि धर्मवद्धन' शीपंक लेख ( व्र॑मासिक राजस्थान; भाद्रपद १६६३ ) में उपाध्याय धर्मंचर््धन के जीवनवृत्तान्त पर अच्छा प्रकाश डाढछा हे। तदनुसार इनका जन्म स० १७८० मे हुआ था और इनका जन्म नाम “घरमसी' ( घर्मर्सिह ) था इन्दोने तत्काछीन खरतरगच्छाचायं श्रीजिनग्त्नसूरि के पास स^ १५१३ म तेरह वपं की अल्पायु में ही दीक्षा ग्रहण की और इनका दीक्षा नाम “घर्मचद्धन' हुआ । पद्रहवींशताब्दी के प्रभावक् खरतर गच्छाचार्य श्रीजिनभद्रसूरि की शिष्य-परस्पगा के मुनि विजयहपं आप के विागुर्‌ थे, जिनके समीप रह्‌ कर आपने अनेक शास्त्रों का अध्ययन किया |मुनि घ्मचद्धन का समस्त जीवन धमंप्रचार एवं अन्थ- रचना में ही व्यतीत हुआ । आपने अनेक प्रदेशों, नगरों एवं श्रामो में विहार करके धर्मं-प्रचार किया और प्रचुर साहित्य-रचना की । आपको अपने जीवन मे बडा सम्मान आप्त हुआ । आपकी विद्वत्ता की अ्रसिद्धि फेढी । फठतः गच्छनायक् श्रीजिनचन्द्रसूरि ने आपको स० १७४० में उपाध्याय पद से अछकृत किया । आगे चछ कर गच्छ के -तक्काखीन सभी उपाध्यायो मे वयोवृद्ध एव ज्ञानवृद्ध होने के कारण आप महोपाध्याय पद्‌ से विभूधित हुए ।खट भग ८० वपं की आयु में यशस्वी एव दीवंजीवन प्रात्र करके मुनि धमंवद्ध॑न ने इहटीला सवरण की । जयसुन्डर,




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now