हिंदी आलोचना का इतिहास | Hindi Aalochanaa Kaa Itihaas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-कम पटला अध्यायविषय प्रवेश भ नैन स अलंकार संप्रदाय, वक्रोक्ति संप्रदाय, रीति संप्रदाय, ध्वनि संप्रदाय, रस संप्रदाय, संस्कृत साहित्य में व्यावहारिक आलोचना का रूप, हिन्दी साहित्य का रीति काल ।दूसरा अध्यायनदी आलोचना का आरंभ युगतत्कालीन परिस्थितियाँ, परंपरा और नवीनता का योग, हिन्दी आलोचना का प्रारम्भिक रूप, सैद्धान्तिक आलोचना--भारतेंदु, बाबू देवकीनन्दन खत्री, पर रामचन्द्र शुक्ट, व्यावहारिक आलोचना--प्रेमघन जी, सार सुघानिधि संपादक, पं० बालकृप्ण भट्ट ।तीसरा अध्यायविकास युग (नि्णयात्मक समीक्षा)तत्कालीन परिस्थितियाँ, पुनरुत्थानवादी स्वर, उप- योगितावादी और रीतिवादी प्रवृत्तियाँ, प० महाबीर प्रसाद द्विवेदी, (विक्रमांक देव चरित चर्चा, नैषघचरित चर्चा, कालिदास की निरकुशता, समसामयिक साहित्य- कारों कौ आखोचना, विषय), मिश्चवन्धु (समालोचना की. दृष्टि, साहित्यिकता, मिश्रबन्धु विनोद, हिन्दी नवरत्न), नवीन प्रवत्तियों के अन्य आलोचक, रीतिवादीपृष्ठ १-ट८<-२४२९-स्ट




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