मोक्षशास्त्र सटीक | Mokshshastra Satik
श्रेणी : जैन धर्म / Jain Dharm

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutShri Umaswami Ji
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
254
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about श्री उमस्वामी जी - Shri Umaswami Ji
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ १७ ]प्रशनावली चतुर्थ अध्याय । | विषय भष्याय चतर
| कालद्रव्यका वर्णन ५ ३९-४०
विप नस्या सत्न | गुणका लक्षण ५ ४१अजीवास्तिकाय ५
्रव्योकी गणना ५ २-३-३९
ट्र्ब्योकी विधेषता ५ ४-७प्ययका लक्षण ५ २
प्ररनावरी पश्चम अधष्याय ।.्रज्येकि प्रदैर्योका योगके भेद व स्वरूप ६ १
वणन ५ ८-१९ | आसरत्रकाखरर्प ६ २
द्रव्योकि रहनेका योगके निसित्तसे
स्थान ५ १९-१६ आस्लवके मेद् ६ ३
दन्योकि उपकारका स्वामीकी अपेक्षा
वणेन ५ १७.२२ आस्रचके सेद् ६ ४
पुद्रटका खक्षण ५ २३ | साम्परायिक आसवके
पुद्रटकी पयय ५ यष्ट मेद ६ ५
पुदलके मेद ५. २५ | आख्रवकी विद्यॉपतामें
सन्धोकी उत्पत्तिके कारणं ६ &
कारण ५ २६-२८) अधिकरणके भेद ६ ७
दरेन्यका छक्चण ५ २९ | जीवाधिकरणकेभेद ६ ८
सत्तका छश्ण ५ ३० | अजीवायिक्ररणके भेद ६ ९
नित्यका चरण , ५ ३१ | ज्ञानावरण ओर दरना-
पक्र ही धमेमें विरुद्ध. वरणकरे आखव ६ १०
धर्मीका समन्वय ५ ३२ | असाता वेदनीयके
परमाणुओंमें वन्ध आस्व ६ ११
होनेका वर्णन ५ ३३ ३७ सातवेदनीयके. आखव £ १२
द्रव्यका प्रकारान्तरसे दरनमोदनीयके » ६. १३लभृण ५ ३८ ` चारि्रमोहनीयके +» ६ १४1
User Reviews
No Reviews | Add Yours...