विनय पिटक (1635) एसी 727 | Vinay Pitak (1635)ac 727

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
23 MB
कुल पष्ठ :
615
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ९ |प्रस्तावको दुहदराते हुये उसके विपक्षमें बोलनेके लिये तीन बार तक अवसर दिया जाता था, जिसे अ न -
श्रावण कहते थे; और अन्तमें श्रा र णा हारा सम्मतिके परिणामकों सुनाया जाता था ।अन्य पुराने प्रंथोंकी भाँति इस विनय-पिटकमें वर्णित विषयोंकी सुर्खी देनेंका ख्याल बहुत ही
कम रनखा गया है । वस्तुतः यह प्रंथ तो कंटस्थ करनेवालोंके लिये था, और उनके लिये सुखियाँ उतनी
आवश्यक न थीं । मेंने सभी जगह अपेक्षित सुखियोंको भिन्न टाइपोंमें दे दिया है। अपने पहिलेके अनु-
वादोंकी भाँति यहाँ भी अन्तमें विस्तृत परिशिष्ट दे दिया है । यदि पाठकोंकी सहायता प्राप्त होगी, तो
रह गई शरुटियोंको दूसरे संस्करणमें ठीक कर दिया जायेगा ।ल्हासा )उन बज है राहुल साकृत्यायनर
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