पतझड़ कब तक | Patjhar Kab Tak

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनुक्रमजय जय जय हे भारती जगती है जीवन भरने को सुपधिकघाव बहुत ही गहरा है कल जहां दीवाली थी कंसे दोप जलायें साथी किस तरह मनायें दीवाली भदमसौर व्यवस्थाकहां है वे खुदियामैं मानव हूँआदमी को प्यार देंबुक चुका हृदय का ही दीपक वीरों के प्रतिधरती हिन्दुस्तान की साधियों धाम लो मशाल साथी चलोये जमी महानचलना हो होगा'पले चलोकरनी-कथनी मे अन्तर हो---? श्रम पुजारियो उठी प्यारा देश हमारा है फिर दे मोवा आया है जाग जवानबया हें कुन्वा हमारा17 18 20 21 23 25 27 29 31 33 35 3 38 40 42 १३ 45 46 47 49 51 53 55 5 49




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