पद्माकर पद्मानियल काव्यकलाकुशलेश | Padmakar Paddhaniyal kavykalakushlesh

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutDr. Bhalachandraray Telang
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
358
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ॰ भालचन्द्रराय तेलंग - Dr. Bhalachandraray Telang
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)र प्याकूर-भीदाक्षिणात्य विबुधा - इन दाक्षिणात्य विबुधो मे महाकवि पद्माकर
के पुवंज मधुकर भह थं जिनके पूत कानाम गगारामथा -तिहि तनज सु गगाराम जान।
सनमान ल्व काशी सुथान ।से यह पता चलता ह कि गढामडला अनेके वाद उनके पुत्र गगाराम ने
कारी मे सन्मान प्राप्त किया और वे वहीं रहने लगे,तिनके सुत्त भे तत्सदृश गगाजल अभिराम ।
नामधेय दिख्यात महिमडल गगाराम ॥२गंगाराम के पुत्र मोहन तथा उनके पुत्रका नाम गोविद था।मोहन सुनन्द {तहि धौ गुविन्द
विख्यात विबुध वृध कुमृद चन्द 11४1३इसका समथंन मनहरण छद की इन पवितियो से भी होता हं -तिनके सुवन भये मोहन महत मतितासु सुत श्रीमत श्री गोविद सुनामाह्ं।
तिनके सुवन शुभ प्रगट जनारदनदेव द्विज सेवी गणनिघि सिधिकामा हुं ॥४पद्याकर कवि के पौत्र गदाधर भट्ट ने अपने ग्रन्थ ' केसरसभाविनोद *५
मे जनादन का परिचय इन दो उल्लेखनीय ओौर महत्वपुणं पद्यो मे इस प्रकार
किया ह - |गोविन्दनन्द पडत प्रवीणमडित सुबुद्धि प्रतिभा नवौन ।
जगविदित जनादन तायु नामकिय सप्तशती सुरभिराधाम ॥५।।श्नी रामचन्द्र नखशिख सुवे
निय सुध्यान पुजा विश्चेप ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...