पद्माकर पद्मानियल काव्यकलाकुशलेश | Padmakar Paddhaniyal kavykalakushlesh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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र प्याकूर-भीदाक्षिणात्य विबुधा - इन दाक्षिणात्य विबुधो मे महाकवि पद्माकर के पुवंज मधुकर भह थं जिनके पूत कानाम गगारामथा -तिहि तनज सु गगाराम जान। सनमान ल्व काशी सुथान ।से यह पता चलता ह कि गढामडला अनेके वाद उनके पुत्र गगाराम ने कारी मे सन्मान प्राप्त किया और वे वहीं रहने लगे,तिनके सुत्त भे तत्सदृश गगाजल अभिराम । नामधेय दिख्यात महिमडल गगाराम ॥२गंगाराम के पुत्र मोहन तथा उनके पुत्रका नाम गोविद था।मोहन सुनन्द {तहि धौ गुविन्द विख्यात विबुध वृध कुमृद चन्द 11४1३इसका समथंन मनहरण छद की इन पवितियो से भी होता हं -तिनके सुवन भये मोहन महत मतितासु सुत श्रीमत श्री गोविद सुनामाह्‌ं। तिनके सुवन शुभ प्रगट जनारदनदेव द्विज सेवी गणनिघि सिधिकामा हुं ॥४पद्याकर कवि के पौत्र गदाधर भट्ट ने अपने ग्रन्थ ' केसरसभाविनोद *५ मे जनादन का परिचय इन दो उल्लेखनीय ओौर महत्वपुणं पद्यो मे इस प्रकार किया ह - |गोविन्दनन्द पडत प्रवीणमडित सुबुद्धि प्रतिभा नवौन । जगविदित जनादन तायु नामकिय सप्तशती सुरभिराधाम ॥५।।श्नी रामचन्द्र नखशिख सुवे निय सुध्यान पुजा विश्चेप ।




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