श्रीमान लोंकशह | Shreeman Lonkashah

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
17 MB
कुल पष्ठ :
417
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ९३ )इस भम 4৫ ग्रन्थ 9 पष्प चों शक
रिरि ति अने अहिं ।, नामकी एक र हमारे
त्मीय बन्धु गे भेजी ई मिली हैजि ले कहें प्ररिद्ध
'विवर्य मुनि महाराज नानच॑ंदजी । यदह पुरुत मुनिश्री
वाजी पीर सनिश्री न्यायवि जी महास ले
माला षन्द होने के पश्चात् प्रकाशित ई है। इस किताब ` टाई-
ভি न्ति पेजपर ति 1 है कि :---छुप २ 1 हैकान्तिनोयुग ( तिकार लं उवलन्त चित्र )।
दम दता ই श्रीमान् 'तबालजी की लि हुई “ धर्म
का ह” नामकीले माला मेंजो इलि पर
थाउन 1 व पुम्तकाकारमें नःमु करवाने की व~
ता प्रतीत ई है थवा स्थानकवासखी ॥ श्री नजीस्वामी
जो भो छ दिन ए महपतती का दोरा तोड़ कर जेनमन्दिर
मूर्ति को मानने लगे है उन के लिए श्रीमान् न्तबालजी ने
«धमं ण लौं शाह” नामकी लेखमाला लि अपने परितप्त
खमाज ` आश सन दिया था किन उस ले माला का फ -
जल्टा द्वी हुआ और तदलुरुप स्वामी कल्या चन्दजी एवं गुलाब-
चन्दजी जैसे प्रतीत विद्वान साधु हाली में महपती
का ड़ोरा तोड़ सन्दिर मूर्ति के उपालक बन गए है' । अतएवं
हुत ज री है + सर परिताप के लिए भी स्थानकवासी माज
रै न न्त्वना वो मिलनी ही. हिये अतः भव
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