हिंदुस्तान के निवासियों का जीवन और उनकी परिस्थितियाँ | Life and Condition of the people of Hindustan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अध्ययन क्षेत्र 1} अकगानौँ (लोदी और सूर) के अध्ययन के लिए मैंने “तारीख-ए-शे रशाही”, “तारीख-ए-दाऊदी” और “वाकयात-ए-मुश्ताकी” की सहायता ली है | “तारीख-ए- शेरशाही” ऐसे अनेक लोगों की जीवनियों के सतर्क संकलन के लिए प्रसिद्ध है जो उस समय जीवित थे और जो उन दुश्यों के सक्रिय भागीदार थे और तदनन्तर जिन्‍्होने अपने अनुभव लेखक को सुनाए, जिसने आवश्यक सावधानी और परीक्षण के पश्चात्‌ उन्हें संकलित किया ।\ अन्य दो वृत्तान्त उतना विवेचन या संतुलन प्रदर्शित नहीं करते। “तारीख-ए-दाऊदी”, खण्डित और बिखरी है और असम्बद्ध संस्मरणों से कुछ अधिक नहीं है।” इसी तरह “वाकयात-ए-मुश्ताकी” क्रमबद्ध नही हैं और उसमें लम्बे विपयांतर है । दोनों ग्रंथ कौतुकों तथा अंधविश्वासों से परिपूर्ण है, विशेषतः वाकयात में तत्कालीन प्रसिद्ध सरदारों और संतों के उपाख्यानों, चमत्कारो, प्रेतों, दानवों, जादू और बाजी- गरी की मूझं॑तापूर्ण कहानियों की खिचड़ी कृति को कुरूप कर देती है और इन सबसे लेखक की और उसके काल के अंधविश्वास की प्रवृत्ति श्रकट होती है । यह कहने की भी आवश्यकता नहीं कि यदि अन्य किसी वर्णन के लिए नहीं तो कम से कम धार्मिक जीवन के समुचित परिवोध के लिये इन विकृतियों का ज्ञान बहुमूल्य है । अभिलेखों में से स्वांदमीर का “हुमायूँनामा” भी एक मनोरंजक दस्तावेज है। अपने इस अतिम ग्रंथ को उस प्रसिद्ध इतिहासकार ने मुगल सम्राट हुमायू के विशेष आग्रह पर 7584 ई० (941 हि०) के भ्रारंभ में लिखा था। सम्राट द्वारा प्रवर्तित नवीन युवितयों और अनूठे रचना कौशल का उल्लेख इसकी विशेषता है ।* हाजी दबीर द्वारा अरबी भाषा में लिखित गुजरात के इतिहास का उल्लेख पहले ही कर दिया गया है | अब तो इसका अत्युत्तम संस्करण उपलब्ध है । अन्ते में अबुल फज्ल के प्रसिद्ध ग्रथ. “आइन-ए-अकबरी” का उल्लेख किया जा सकता है जिसका कुशल सम्पादन ब्लाकमेन ने और अंग्रेजी अनुवाद ब्लाकमेन और जैरेट ने किया है। विद्वान लेखक भौर संपादकोंने दस कृति की महान्‌ विशेषताओं की मुक्‍्तकंठ से प्रशंसा की है | लेखक ने दावा किया है कि उसने कृति का संकलन विश्वकोप के तरीके पर किया है, जहां सब तरह की उपयोगी सूचना मिलेगी और जिसकी सहायता लोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संदर्भ, अनुदेश और मनोरंजन 1. “বান হা शा०” 31 2, इलि० डाउ० चतुर्थ, 53৭ 1 अफगानों का और अधिक सम्बद्ध वर्णन 1613 में नियामतुल्ला द्वारा संकलित ग्रंथ “मखजन-ए-अफगानी” में मिलता है । 3. ख्वांद, १251




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