असंगठित क्षेत्र के साबुन उद्धोगों की विपणन सम्बन्धी समस्यायेँ | Asangathita Kshetra Ke Sabun Udhogo Ki Vipadan Sambandhi Samasyaye

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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की स्थिति पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। परन्तु शोध विषय के शीर्षक “असगठित क्षेत्र के साबुन उद्योगो की विपणन सम्बन्धी समस्याये जनपद इलाहाबाद के विशेष सन्दर्भ के अनुसार जनपद इलाहाबाद पर केन्द्रित किया गया है | यह प्राचीन काल सो उत्त्र प्रदेश का केन्द्र बिन्दु रहा है| जनपद को प्रयाग के नाम से जाना जाता हे। कहा जाता हे कि प्रजापति ब्रह्म जी कई हजार वर्षो तक प्रयाग मे घोर तपस्या की थी। इसलिये यह प्रयाग के नाम से विख्यात था। जनपद के सामाजिक, आर्थिक एव नेतिक उत्थान को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अप्रैल 1997 को राज्य सरकार द्वारा जनपद कौशाम्बी का सृजन कर जनपद इलाहाबाद का पुनर्गठन किया गया। इलाहाबाद जनपद इलाहाबाद मण्डल के पूर्वी क्षेत्र मे स्थित है। विभाजन से पूर्व जनपद का भौगोलिक क्षेत्रफल 7261 वर्ग किमी० था। पुनर्गठन के पश्चात जनपद इलाहाबाद का क्षेत्रफल घट कर 54372 वर्ग किमी० तथा जनपद कौशाम्बी का 1823 8 वर्ग किमी० हो गया। जनपद की प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 1997-98 मे मेजा तहसील को पुनर्गठित कर कोराव तहसील का सृजन किया गया। जनपद को 8 तहसीलों तथा 20 विकास खण्डो में बाटा गया है| जनपद मे कुल 2978 ग्राम है। जिसमे आबाद ग्रामो की सख्या 2799 तथा गैर आबाद ग्रामो की सख्या 179 है। इस शोध कार्य का अध्ययन क्षेत्र असगठित क्षेत्र मे स्थापित साबुन उद्योग की इकाईया की विपणन सम्बन्धी समस्याओं को सीमित रखा गया हे। समस्याओं के उत्पन्न होने के वास्तविक कारणो का अध्ययन करना तथा उनके निदान के लिए आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करना है - शोध कार्य की परिकल्पना : शोध कार्य कुछ मान्यताओ एव परिकल्पनाओ पर आधारित होता है। इस शोध




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