मध्यकालीन बनारस का इतिहास 1206-1771 | History Of Banaras In Medieval Period 1206-1771

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पुराणो मे आये काशी के विवरण से कई बाते हमारे सामने आती है। काश्यो अथति काशीवासियो ओर हैहयो मे बहुत समय तक युद होता रहा । काशी के राजवश मे दो दिवोदास हुए । प्रथम दिवोदास भीमरथ का पुत्र था दूसरा सुदेव का। दोनो दिवोदास के मध्य कम से कम तीन राजाओ ने राज्य किया। यथा अष्टरथ, हर्यश्व ओर सुदेव ने काशी पर राज्य किया। प्रतर्दन दिवोदास द्वितीय के पुत्र थे। दिवोदास प्रथम ने दूसरी वाराणसी की स्थापना की थी। हैहयो ओर काशीवासियो के परस्पर सम्बन्ध इस बात के परिचायक है कि मध्य देश के राजा काशी पर नजर रखते थे। ११वी सदी मे राजा गागेय देव द्वारा काशी पर अधिकार जमा लेना इसी तथ्य का पोषक है।“महाभारत कालीन काशीव्यास की शतसाहस्त्री संहिता मे काशी का कई जगह उल्लेख आया हे । काशीराज की पुत्री सार्वसेनीं का विवाह भरत दौष्यन्त से हुआ था। भीष्म ने काशीराज की तीन पुत्रियों अम्बा, अम्बालिका ओर अबिका को स्वयवर मे अपने भाई विचित्रवीर्य के लिए जीता था।“ भीष्म दारा काशिराज सुबाहु पर विजय पाने का उल्लेख प्राप्त होता है ।” तथ्य यह स्पष्ट करते हँ कि काशिराज युधिष्ठिर के मित्र थे। काशिराज हारा कुरुक्षेत्र के युद् मे पाण्डवो की सहायता करने का विवरण प्राप्त होता है (^ काशिराज का युद्ध क्षेत्र मेँ सुवर्णं माल्य विभूषित ঘীভী पर चदन तथ। शैव्य के साथ उनका पांडव सेना के बीच ३०,००० रथों के साथ उपस्थित रहने का उल्लेख” স্তাণ লীলীঘন্ল্: काशी का इतिहास, पूवोक्त, प° २५५ म्रहाभारत, एसण्विष्णु सुकथानकार दवारा सम्पादित, भंडारकर ओरियन्टल रिसर्च इन्सटीद्च्यूट, पुना.१६३३ से१६५६ से उत आदिपर्व, अध्याय ६५.उद्योग पर्व, ११२/ ६४.४ सभा पर्व, अ.३०* उद्योग पर्व, अ. ७२.^ द्रौण पर्व, २२८३८.




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