वैराग्य भावना | Vairagya Bhavana

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Vairagya Bhavana by भक्ति विजय जिगणी- Bhakti Vijay Jigni

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१३) छो स्वरूप भावना बोधीदुल भभावना धर्मदुर्ल भ भावना शुभ भावना विषक चारों चोरकी ऊथा जिन प्रतिमाके दर्शन किस प्रकार करना परमात्मा महादीरका गुण एक गुर्जर कविका कथन इट अने गुरुषरपा सवाद ज्ञाता सूजअकआदिमे जिन प्रतिमा पूजनक्ता पाठ अनाधी স্তুলিক্কা তোর आनेवाली चौदीसीें तीर रॉकानाम हितोपदेश आत्मशुद्धिकरनेके उपाय दो बालकऊा दृप्टात छक्ष्मीनी चचन्ता कुतछदेदी राणीका दृष्टात देव द्रव्य भषण नर्हिरूरनेपर सागरशेठसा दृत उठदीका दृष्ठात ८१ ८ दध ৫৫ ८९ १०२ १०५ ११३ १३६ १४२ १४६ १६० ও १७८ १८० १८३ १९०




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