दशाश्रुतस्कन्धसूत्रं | Dasha Shrut Skandh Sutram

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Dasha Shrut Skandh Sutram by आत्माराम जी महाराज - Aatnaram Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(७) ५ की पड़ी लगन है | सेयामाय इतना उच्च है कि निर्वन से निर्वन व्यक्ति के यहा भी कोर्ट छोटे से छोटा फाम हो तो भाग फर जाते है । अपन हम ६ सहायक हो गए] इम पर्प हमारे सर्ममाननीय उपा- ध्याय जी महाराज का चातुर्मास रायलपिण्डी शहर में हुआ | वहा सिए छुके उनके दशनो का साभाण्य ग्राप्त हुआ । फलुत' शेप दो सहा- यक हमारे और पढे | एक लाला तेजेशाह जी मालिक फर्म लाला বলার হত বল্ল) লজ) লক্ষ वा क्लाथ मचेण्ट, रावरूपिण्डी । न 11 ॥ 11 ॥ श्रीमान्‌ ल्लाला राचीयाह जी 41111 01811110011 111111 ॥ || ||] 1121 11111 11111111111 11111111111 11115 11111111 11111 1111111 ||| 11111 |।।111 7 18111011111 | जूं॥। 11 1 1॥ 11 1॥ 1॥ 1॥ 1 111॥11॥॥ ॥॥!॥॥ हैं श्रीमान्‌ छाला तेजेशाह जी दूमरे लाला रोचीशाह जी मालिक फर्म लाला फन्हेयाशाह रोचीणाह जी जेन, छाथ मर्चेण्ट, रायलपिण्डी । मे इन दोनो सज्जनो की करो तफ प्रशंसा फरूँ। आपकी शाखश्द्धा, उपाध्याय जी महाराज के সবি अनन्य भक्ति जार ज्ञानदान मे उदार- हृदयता देखकर मेरा ত্য गद्गदू हो गया। मन-ही-मन ग्रफुछित होता आर भगान्‌ फो राख राख धन्य- वाद देता | इन सज्ञनों ने केयल हसी धर्म कार्य मे दी पने हृदय की पिश्ञालता का परिचय नहीं दिया फिन्‍्तु इनके यशस्प्री हाथो से अनेक




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