रैन बसेरा | Rain Basera
श्रेणी : काव्य / Poetry

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
120
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)बूढो में भी तो प्यास. बढी:'
उनको भी भायी नही मढी;
ले गये उन्हें भी भव्य भवन
मावी न रोक चिर-बधन की।
कटिया मे एक श्रकिचन की।जो गये भले ही वे जाते,
पर सुख तो महंलो में पाते,
सुनती हैं में इससे-उससे
लुट गई सम्पदा सव उनकी ।
कूटिया मे एक अकिचन की।घुन गईं थूनियाँ, फूस उडा,
यह निरानन्द मानस उजडा,
इस सूती बस्ती में फिर भी
क्या होगी पेल झरुनभुन की |
कूटिया से एक अकिचन की !रैसवसेरा
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