रैन बसेरा | Rain Basera

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Rain Basera by श्री शंभुदयाल सक्सेना - Shri Shambhudayal Saxena

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बूढो में भी तो प्यास. बढी:' उनको भी भायी नही मढी; ले गये उन्हें भी भव्य भवन मावी न रोक चिर-बधन की। कटिया मे एक श्रकिचन की। जो गये भले ही वे जाते, पर सुख तो महंलो में पाते, सुनती हैं में इससे-उससे लुट गई सम्पदा सव उनकी । कूटिया मे एक अकिचन की। घुन गईं थूनियाँ, फूस उडा, यह निरानन्द मानस उजडा, इस सूती बस्ती में फिर भी क्या होगी पेल झरुनभुन की | कूटिया से एक अकिचन की ! रैसवसेरा




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