ओथेलो | Othello

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रांगेय राघव - Rangaiya Raghav

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विलियम शेक्सपियर - WILLIAM SHAKESPEARE

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पहला अंक १७ तैवेनशियो : है भगवान 1 वह्‌ घर से भाग कंसे निकली ? मेरा रक्त ही मुझे धोखा दे गया ? भरे पिताञ्रो ! आज से कभी बाहरी बातो को देखकर ही अ्रपनी पुत्रियों पर विश्वास मत कर बैठना । रोडरियो ! ऐसे भी तो कुछ जादू-टोने होते है न जिनसे क्वारी लडकियो की मति फेर दी जाती है, क्या तुमने ऐसी बातो के बारे मे नही पडा? रोडरिगो : हाँ श्रीमान्‌, पडा है । ब्रेबेनशियो : अरे मेरे भाई को जगा दो | रोडरियगो ! भ्रच्छा होता कि तुम ही उससे विवाह कर लेते ! अरे, कुछ इधर जाओ, कुछ उधर ढूंढो । ( नोकरों से कह कर फिर रोडरिगो से ) तुम्हे भी कुछ पता है कि वह कहाँ होगी ? कहाँ होगा वह सूर ! रोडरिगो : शायद मे बता सकूं, लेकिन और रक्षक अपने साथ कर लीजिये ओ्रौर मेरे साथ चलिये । | द्रेदेनुशियो : कृपया तुम्ही वताओ्नो । मैं हर घर को वुलाऊँंगा । शायद ही मेरे वुलाए से किसी घर से लोग मेरे साथ चलने को न निकले। ररे शस्त्र वाव लो । ! और हथियार ले लो ! रात के लिये कुछ विशेष अफसरों को भी तत्पर करो । चलो मेरे अच्छे रोडरिगो तुम जो कष्ट मेरे लिये उठा रहे हो, तुम देखना, मे कभी तुम्हे उसका कद चुकाये बिना यो ही नही छोड दूंगा । प्रस्थान | ह्श्य २ [ श्रॉयेलो, इमग्मागो का मश्ालें लिये हुए भनुचरों के साथ प्रवेश ] इआगो : यद्यपि युद्ध-व्यापार मे मैंने हत्याएँ की है, लेकिन इसे मँ श्रपनी चेतना का सार तत्त्व मानता हूँ कि कभी ठडे दिल से खून न किया




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