उत्तरांचलक्षेत्रों में निर्वनीकरण और ग्रामीण स्त्रियों की समस्याएं | Uttranchal Kshetra Me Nirvanikaran Aur Gramin Striyon Ki Samasyayen
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
21
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)जँगल .व पर्याप्त पेयजल उपलब्ध धा लेकिन बढ़तो जनसंख्या व वनों के वाणिज्यउपयोग करने के कारणा वन विनाशा का सौधा परमाच आस पेयजल पर पड़ रहाहै। बहुगुण ६1१8११५ ने भौ लिखा है 'कि पिछले दो दशाकों में प्रासन कौवन नोति और जनसंख्या के बढूते दबाव ने वनौ में भधानक तबाही कौ है।इतका सोधा प्रभाव हियालय को मिट्टी! और पानो के स्त्रोतों पर पड़ा है।, तारौ उपजाऊ দিত गैटानों को ओर बह रहो: + और पेड़ों के कटान ' केकारणा भूमि को जल धारणा शाक्ति कय हो गई है। और पानो के स्त्रोत सूखतेजा रहे हैं। जिस वजह में पोने के पानो को भरने के लिये काफो फासला तथकरना पड़ता है । य पि सरकार द्वारा सभौ गामों में सन् 1990 तक पेयजलको समस्या दूर करने का लक्षय रखा था लेकिन अभो भौ पर्वतीय क्त्र मेंतरमस्यागरस्त गाव है। हमारे चयनित गाव कौ लगभग 17.0 प्रतिगत स्रियीं ।ने पेयजल को समस्या बतायो है उनमें ते लगभग 2५.0 प्रतिंगात स्त्रियों नेपेपजल का दूरं उपलब्ध होना तथा 5%,0 प्रतिशत ने गर्मो' के दिनों में पेयजल
কাল सूखने कौ समस्या बतायौ। गमौ के दिनों में पेयजल स्त्रीज्ञीं में कमोहोते के कारणम लगभग 21.0 प्रत्त स्त्रियों ने पक्ति हकर या क्रम सेपेयजल बर्तनों को भरने को बात बताथो जिसमे स्त्रियों को अच्छा खासा समधबबादि करना पड़ता टै] जिन गांवाँ में जन्न संस्थान/जल निगम द्वारा पेयजलउपलब्ध कराया जात्ता है उन गांवों में नली के दूने पा खराब होने पर ठोकन करने কী समस्या लगभग 16.0 प्रतिशत स्वियौ ने बतायो क्योफि एक तरपःपेयजल के मूल स्त्रोत वे गावो में नलों के द्वारा पानों घर-घर देने का प्राविधानकिया है ती दूरौ तरफ नलौ तै पेपजल व्यवस्था ठीक नदहीनेकै कारणा .गमवात्तौ मूल जल स्त्रोतः के अभाव कै कारणा ब्वधर-उधर के पेयजल स्त्रीतौ कौ: ` खीज में लगते हैं जिससे स्त्रियों के कष्ट में बृद्धिं होतोः है। ताद्ारणात्या: - हमारे चयनितं गां भ बहर, गल, नौला कुजा, नदौ तथा नलौ घे पौन
का पानौ -लिया-जात्ताः है। साधारण्यतयाः बरसात के. दिनी म ঘুচল होनेले गृल दब জাতী জিমি কাত पैयजल लाने के লি दुर जाना पड़ता है| 7. जा
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