मानवता अंक | Manavta Ank

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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>॥ ধা( ११ )र४-अमुसे | ( भारतेन्दु हस्श्विन्द्रजी ) ˆ“ भ “सतके लक्षण ( श्रीमगवतरसिकी ) 1१ ५६० “दरिनामम आल्स्य क्यों १( श्रीटरिदासनी ) ** ५६४२७-व्यथ अभिमान छोड़ दे (श्रीनारावगखामीजी ) ५७९ २८-मानव-जन्म भजन विना व्ययं श्रीसूरदासनी ) ५९५ ३९-भक्तिदीन जीवन ( श्रीनागरीदासजी ) *** ६०२४१-दया ( भीर्न्रीरदामस ) इ४२-जानतीना শশা € कन (न ৬৯৬ ४र-मनुप्य शगमने क्वान्य १( १ তি४४-तीनों पन ऐसे ही यो हि ( ४एर7 7 ३1নিबहरगे २-आउसुरी-सम्त्तिसे रक्षाक लिये मानवक्री भगवानसे प्रार्थना भीतरी मुखप २-मानवताके सरक भगवान्‌ विष्णु ˆ १ २-भरगवान श्रीकृष्णचन्द्रमे मानवताका सर्वाङ्गीण সন্ধান *** “** ४८ ४-मानवताके सशोधक भगवान्‌ शंकर *** ९६ ५-भगवान्‌ श्रीरामचन्द्रमे मानवताका महानই ) বীলিহক লিমা ०५५ ४ ) गोमे श्रসাক ২৬৩^ (4( (৮৫৫९५4শরरे ८५ -६, ~< | ५ श 3} ~ ¢. < পা ও 1 १ १ ~ >$न्क সক! + न | ५१ ০৪৫ द ক 14 4 र -ॐসপ উস এপ সর্ট ঠা बन শ্শ্‌ ] স্‌ ৮৫১8 ~} ५ 23,<मत गान्धर -सनिर्गीरा सदर७ ৮80 ৮81 १0०७ 1 न 2] “चজাহগ ज *** १४४६-मानवताकी रक्षा करनेवाली असुरमंहारिणी दश्भुजा माता * ১: ७-विध्ननाथक श्रीगणेशजी २४० कर्मयोगी राजा जनक ˆ २८८ ९--कर्मत्यागी महर्षि यानवस्स्य *** २८८ १०-कर्मयोगी भगवान्‌ श्रीकृष्ण *** २८८ ११-परम विरक्त श्रीक्षपभ्देव *** २८८१२---१५-आदुश त्याग और मिलन( १) रामकां वनगमन ˆ“ * ३३६(२) चिचकूटमे पदुकदान *** ३३६(३ ) चित्रक््ट-मिटन * ३३६ (४ ) अयोध्या-मिटन ˆ“ ३३६ १६-कौसल्याका भरतपर स्मेह 5 इ८४१७-सुमित्राका शन्रप्ननों आदेश १८-मदाल्साक्री पुत्रको खोरी १९-शेल्याफा पतिको प्रयोध५ ५ त (७ श्र ০6२०---१३-आदुर्श हिला इन्ती०(१ ) बिपत्ति मिक्षा की (२) ब्राद्मणक्ती प्राणरक्षा(३ ) पुरो नदेग(४ ) जेठ-जेठानीके साथ वनगमन৬ রঙ 1८९ ५ 9१ ৪41४ ५ [] ५०९ ৭11८९ „९ ९ ©२४--२७-आदर्स सला--क्षादर्श गो-सेवक४८० ४८<(१ ) ग्वाल्याल्ससा (२) सुदामा-सखादुर्गा लाइन १-प्रहतिस द्धागारे গছविद्वास' पी जोर? 3है 5 ॥। ५ ४ $पररा श्दरगा गे १-२-दस सानउधन ३-इप्दीयों गग ~ ---<-साना-पितङ मदर (११ नग म {२ ) হাল (> देद्य नीया=-= = श१ হ } र< =.८- १; रामरा शरा छत इसेभन




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