पालतू पशु | Paalatuu Pashu

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Paalatuu Pashu by प्रेमकांत भार्गव - Premkant Bhargavहरबंश सिंह - Harbansh Singh

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हरबंश सिंह - Harbansh Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ढोर पर मेबाती कोसी इस नस्ल का मूल स्थान तो मधुरा जिले का कोसी प्रदेश तथा भरतपुर और अलवर की भूतपूर्व रियासत्तें हैं। बैल छोटे होते हैं। वे भारी हल और छकड़े को खींचने के लिए उपयोगी होते हैं। इस नस्ल की गायें पर्याप्त दूध देती हैं। इन जानवरों का मध्यम आकार का सिर तथा उभरा हुआ माथा होता है। सींग मोटे ऊपर तथा बाहर की तरफ मुड़कर तब भीतर और पीछे की तरफ मुड़े होते हैं। पेट लम्बा और गहरा होता है। टांगें छोटी और उम्दा होती हैं। दुभ पतली और लम्बी व धन मध्यम आकार के होते हैं। सामान्यत इस नस्ल के जानवरों का रंग सफेद होता है। सिर गर्दन कन्धों और पुटूठों पर हल्का सा काला रंग होता है। नागौर राजस्थान के नागौर और जोधपुर जिलों में पायी जाने वाली यह भारवाही नस्ल है। बैल बड़े आकार के शक्तिशाली चुस्त और गहरी रेत में कठिन भारवहन के काम को कर सकते हैं। उनकी दुलकी चाल भी अच्छी होती है और सड़कों पर तेज काम के लिए भी उन्हें पसन्द किया जाता है। आकार में गायें अपेक्षतया छोटी होती हैं और दूध कम मात्रा में देती हैं। इस नस्ल के जानवरों की मुख्य विशिष्टता है छोटा सिर और चपटा माथा। सींग सुविकसित ऊपर बाहर की ओर मुड़े और तब भीतर की ओर मुड़े होते हैं। उनका शरीर लम्बा और टांगें सुगठित तथा मजबूत शिश्नच्छद मुड़ा हुआ और दुम छोटी होती है। इस नस्ल के ढोरों का सामान्य रंग सफेद होता है। निमाड़ी नर्मदा नदी की घाटी में पायी जाने वाली भारवाही नस्ल है। भारवहन के लिए बैलों को बहुत पसन्द किया जाता है। गायें दूध कम मात्रा में देती हैं। इस नस्ल के जानवरों का सिर लम्बा और माथा उभरा हुआ होता है। सींग मध्यम आकार के ऊपर बाहर की ओर और अन्त में सिरों पर पीछे की ओर मुड़े होते हैं। उनका शरीर लम्बा और गहरा हबाना सुविकसित तथा शिश्नच्छद कुछ कुछ झूलता हुआ और पुट्ठे मजबूत होते हैं। इन जानवरों का रंग लाल होता है और शरीर के विभिन्‍न भागों में सफेद रंग के बड़े बड़े चकतते होते हैं । ऑगोल नेल्‍लोर यह नस्ल आा्ध्रप्रदेश के नेल्लोर और गुन्दूर जिलों की है। कृष्णा और गोदावरी के शुष्क ताल्लुकों में भी यह नस्ल पायी जाती है। बैल भारी और शक्तिशाली तथा छकडा खींचने और भारी जुताई के लिए विशेषत उपयुक्त होते हैं। तेज काम के लिए प्राय उनका योग नहीं किया जाता | गायें पर्याप्त मात्रा में दूध देती हैं | इन जानयर्वे की मुख्य विशिष्टताएं हैं मध्यम आकार का सिर चौड़ा माथा छोटे और टूठदार सींग जो बाहर की ओर जाकर भीतर मुड़े होते हैं। गहरा पेट मजबूत टांगें लम्बी और नुकीली होती दुम। इस नस्ल के जानवरों में सींग भी प्राय ढीले होते हैं। हबाना मध्यम आकार का और थन बराबर बराबर दूरी पर लगे होते हैं। इस नस्ल के जानवरों का सामान्य रंग सफेद धूसर अथवा सफेद रंग में कूबड़ गर्दन और पुट्ठों पर काले तथा गहरे धूसर धब्बे होते हैं। छोटी उम्र के बछड़ों का रंग सफेद होता है। उस पर लाली लिये भूरे धब्बे होते हैं। बछडे के लगभग छः मास के होने पर इन धब्बों का रंग सफेद हो जाता है।




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