वरांग - चरित | Warang-charit

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भयपूर्ण तियेश्च योनि कोप-मान-वच्छना-लोम फल तिर्यद्छ जन्मके कारण कुभोगमूमि-जन्मकारण करम॑भूमिज तियच्न-छलयोनि उपसंहार सप्तम सगं- मनुष्यगतिका समन्य रूप भागभूमि्या भोगभूमिकी भूमि का जलवायु ” की समता `আৰ ভুদা भोगभूमिके कारण पात्रापात्र दाता का स्वरूप पात्र-दानभेद कन्यादान विमर्प दान विज्ञान दान परिपाक पात्रापात्र फल पाणिपात्रजन्मादिक्रम मोगभूमियों फे शरीरादि9. की आगखयु > » विशेय्ताएँअष्टम समं कर्म भूमियों के नाम-संख्या कर्म भूमिजं के प्रधान भेद आयं-अनाये भोजवंडा मनुष्यगतिकी उच्छृएता मनुष्य की भ्रान्ति धर्माचरणकी प्रधानता परिग्रह) पापमूलता पुण्यहीनं की गति पुण्यका सुपाल मनुष्यग तिके कारण मनुष्यपर्याय की दुलेभतता( ११ )५० ५१ ५२ 99 १३ पे ५५-६२ पष 29 2 ५६ ११५६७१9६४११६५. ११ ६६ ६७ ६८ ९६. | शरीर-अनित्यतामनुष्योंकी आयुनवम सर्ग--देवगति के प्रधान भेदभवनवासियोंके भेद व्यन्तरों के भेदज्योतिषियों के भेदवैमानिको के भेदस्वर्गो की स्वनाविमानों का रुपादि बेनदेवगति के कारणदेवों की जन्म प्रक्रियादेवों का शरीर-बेशिष्श्यादिदेवों के वर्गंदेवियांदेवों का आयुद्शम सगंमोक्ष की स्थितिसाक्षका महात्म्यमोक्षगामी जीवमोत्तसाधक तपकर्मक्षय क्रममुक्त जीव का ऊध्वें गमनसमुद्रातশশী শশী শশী ~~~ টীকা পোপ ~मोक्ष गामियों की संख्या का नियममुक्ति उदाहरणभक्तों का आकार-आधार | सिद्धों का स्वरूप| सिद्धों के सुखका निरूपण संसार मोक्षएकादश सर्गझुमार वरांग क्रा प्रन। ! | समय-स्थान-दरी रकी अपेक्षा |। | | | |। मिध्यात्य सम्यक्त्व कथनकी भूमिका| मिथ्यात्व लक्षण-डदाहरण| मिथ्यात्वकी सादिता-आददि मिश्यात्वकी संसारकारणुता सम्यगददीन का स्वरूप६६७१-७७9८-८३८३ ८४-९३ 1




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