काव्य कमल | Kavya Kamal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १७ )देते थे | कहा जाता है कि गोस्‍्वामी तुलसीदास जी से भी इनकी घनिष्ठता थी ।इनका जन्म संवत्‌ १६१० में हुआ । ये अ्रकवर के दरवार के रों में थे और इतिहास-प्रसिद्ध बैरमर्ख़ाँ के पुत्र ये।ये अकबर के मंत्री, सेनापति और किर जद्ँगीर के भी सेनापति रदे ।इनकी कविताओं का संग्रह “रहोमरत्नावली' के नाम से छुपा है ।भूषणभूषण का नाम वीररस के कवियों में बढ़े अभिमान के साथ लिया जाता है। ये छत्रपति शिवाजी के राजकवि थे और उनके साथ युद्धों में भी सम्मिलित होते ये । इस कवि के दिन्टू-गोरव का श्रत्यन्त श्रभि- मान था ओर हिन्दुत्व के नाम पर इनके हृदय में जो तरंगें उठती थी उन्हीं की लहर इनको समस्त कविता मे दिखाई देती है । देश की स्वाधीनता ঈ उपासको का गुणगान इस कवि ने वद़े उत्साद से किया । महेवा के छुत्रसाल पर केवल दस छुन्द लिखे हैं पर वे हो क्रितने ओ्रोजपूर्ण हैं | इनकी कविता के पढ़ते-पढ़ते बीरों की छाती फूल उठती और भुजदंड फड़कने लगते हैं। भूषण सचमुच राष्ट्रीय कवि थे ।इनका जन्म संवत्‌ १६७० में तिकर्वापुर (कानपुर) में हुआ था। इनके पिता का नाम रल्नाकर त्रिपाठी था श्रोर इनके छोटे भाई मतिराम थे, जो ब्रज-भाषा के सुप्रसिद्ध कवि थे | इन्दोने संवत्‌ १७७२ मे इस लोक से प्रस्थान किया ।इनके ग्रन्य--शिवराजभूपण, शिवब्रावनी और छत्नसालदशक हैं ।भारतेन्दु हरिश्चन्द्र भारतेन्दु दरिश्चन्द्र हिन्दी के युगप्रवत्तक ঘ। इन्होंने कविता के श्ज्ञार की गली से निकाल कर राष्रीयता की ओर मोड़ दिया । काव्य, का० २




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