राजनीति शास्त्र भाग 1 | Rajniti Shastra Bhag 1

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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राजनीति शाहत्रक्ा स्वकूप, विस्तार भौर पद्धतियाँ ११ विवेचन ब रता है कि गया किया जाता चाहिए।' ४ रामगोतिल्यासत्र और आवार-ास्‍्त्र मा सोति शास्त्र राजबीति पास्तम राजनीतिक व्यवस्थाता और नीतिशास्त्र या आवार-्यास्‍स्त्र [21003) म॑ नैतिक व्यवस्थाशा विवेवन होता है। दो्ों ही में উপ और अनुचित का विचार होता है। टोनाका सम्दाघ इतना गहरा है कि হানীলি শহেখকী आचार या नीति-्ास्त्रकी ही एक सावा मानते ये 4 श्वाप्तया हि राज्यकोी नागरिरुमों सदुगुणोकी थ्िचा देना चाहिए। प्लेटो से मुस्यत इस बातम आग भाने जाते हैं. कि 2त्होंने राजनीति-आात्त्र सौर आद्ार-श्ास्त्कों अलग-अलग कर दिया। पर उन्होने राजनीति-शास्त्र और नीति-शास्त्र मे जो अन्तर किया वह विधय॑ (+५०३९७7०८) वा ने होकर थ्यास्या पद या रीति (प्य (४००००४५४) का ही है। अरस्तू भी राजनीति-शास्त्र और आचार-थ्ास्त्रमे गहुत तशदीकी पारस्परिक सम्बध मानते हैं। और राजनीतिक प्र*्नो पर मनुष्यके उच्चवम नैतिर निषयका प्रभाव হনে हैं। उदगी सम्मतिर्म राग्यका उद्दे्य खावजनिक कल्याण या अच्छा जीवन है।विमावेक्षी (313८॥।३४ ०) ) पश्चिमके प्रपम प्रसिद्ध लेखक हैं जिन्‍्दोने राजनीति पास्ते स्पध्तर आषार-यास्तरेसे मलग कद दिया । उनके नुखार धमे भौर नत्रिकता (70800 ৯04 1201/7) राज्यके निमामक (739८२) तो হিরা সফাহ রী नहा वेल्दि वे वि्वस्तीय पयनि*द्ाक भी मह्दी हैं। वे केवल उपयोगी सेवक और एजेण्ट हैं। आधुनिक विधारधार सामान्यत' राजतीवि-शास्त और माघार शास्त्रम पनि८्ः सम्बंध बनाये रखनऐे पभमे है 1ध्दीड एक्न तो यद्वां तक कहने है कि यह पता लगाना महरवपूण नही है कि सरकारें गया निर्धारित (90०८४८०४०९) करती हैं बल्ति' यहू নি মক্ষোঘানী जया निर्धारित करता चाहिए। एबं दूसरे लेखकस्य कहना है हि राजनीति शास्त्र और धायार-्यास्थकी मतय करता दोनोकि लिए ही घातक है । आधार-शास्त्रस भतग होकर यजनीनि-यास्य वानुकटी अस्थिर नीद पर टिकता दै माषार-यास्भ राजनीवि्ञास्त्रते अत्ग होकर सकीर्य बोर भावसशूष्ष्म हो जाता है। इसका परिणाम होता है मान मूल्योंका व्यावसायोसरण बोर उतरी विद्वति। अीदिवर द्राउय गा मत है कि राजनीति-शास्त्र मौर भाषार-धास्वरे' बस परिमाणवा अन्तर है गुणका नहों। गप्ा कि 'राजनीति-शास्द बाचा र-शासवका ही भ्यापक रूप है। वह भाग 1 मसं का भवे जिनका उद्धरण ऋननगग ने दिया ह हरे विपरीत £| ওলব্য बहता है. मह आरोप कि समाज शास्त्र हमे দি पर कारे और पृषक मदृत्त और उपयोगिताने स्थाद पर एकरूप सिद्धान्ताके अतिरिक्त स्र श नहों ইলা শহল एबं इछ वाक्यते ही दिप्न-भिन्न फिया णा सहझता है कि 'एसा मह्य टै 9 समान मावसे हमारे भीतर सक्रिय रहने हैं। ই मदानुमार जो मात नैतिक दृष्टिसे अनुखित है दह बसी राजनीतिक হি से म्याय-सगत हो दी तहा सकती । पर यहं सवदा ध्यादहारिर सत्य नही है। হি




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