समराइच्चकहा एक सास्कृतिक अध्ययन | Samraicchkha Ek Sanskratik Addhyan

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : समराइच्चकहा एक सास्कृतिक अध्ययन - Samraicchkha Ek Sanskratik Addhyan
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about झिनकू यादव - Jhinku Yadhav

Add Infomation AboutJhinku Yadhav

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
प्रयथम-अध्याय हरिभद्र सूरि का काल निर्धारणसमराइच्च कहा का नोव प्रव व का आधार बनाने से पूव उसकः रचय्रिता का समय निर्धारण कर लेना आवश्यक ह । समराइच्चकहा और धूत्ताख्पान जाति प्राकृत कथाआ व रचयिता हरिभद्र सूरि थे जा एक অল इवेताम्बराचाय वे লাম से प्रख्यात थे । इनका समय निर्धारण अघालिखित ढंग से क्या जा सकता हू |वुवरयमाला कदा के रचयिता उद्योतन सूरि ने हम्मिद्र सूरि को अपना गुर माता है तथा उन्हाने कुबवल्यमाला कहा को शक सवत ७०० (७-८ ई० ) में समाप्त क्या था ४* जिससे स्पष्ट होता हू कि हरिभद्र की तिथि ७७८ ई० के पूव्र हो रही हागी ।* मुनि जिन विजय ने हरिभद्व के समय तिणय नामक নি” में हरिभद्र द्वारा उल्लिखित आचार्यो की नामावला उनके तिथि क्रम बे! अनुमार इस प्रकार टी ह--धम काति (६०० ६५० ई०), बाउयपटीय के रचयिता भतदरि (६०० ६५०} कुमारि (६२० ७०० ई०) शुभगुप्त (६४० ७०० ई०) भीर चात रक्षित (७०५ ७३२ ६०) ।* ठरिमदर सूरि द्वारा उल्लिषित दस नामावली सं स्पष्ट हाता हू कि हरिभद्र का समय ई० सन ७०० के बाद ही रहा होगा । अत उद्योतन सूरि 4 कुवल्यमालछाक्हा क॑ आधार पर हरिभद्र सूरि वा अभ्युदय काल ७०० ६० से ७७८ ई० तक माना जा सक्ता ह्‌ 1प्रो० आभ्यमर ने हरिभद्र के ऊपर शकक्‍्राचाय का प्रभाव बतलाकर उन्हेशकराचार्य के बाद का विद्वान माना ह ।५ किन्तु मुनि जिन विजय ने हरिभद्र को नकराचाय का पूवव माना है । उने अनुसार शक्राचाय का समय ७७८ ई०9कुबलयमारा अनुच्छेट ६ पृ० ४-- जो इच्छई भवविरह को ण बदए सुयणा । समयं सय सत्य गुरुणा समरमियका कटा जस्य ॥*वहा अनुच्छेट ४३० पृ० २८२-- स्रां सिद्धतेण गुरुजुत्ती सत्तवेहिं जस्स हरिभद्दा । वहु सत्य गय वित्थर पत्थारिय पयड सावत्यां ॥इसका समथन डा० दचरथ शर्मा तथा यम० सी० मोर ने भी क्या है । दसखिए--हटारथ শমী-_অলা चौहान डाइनेस्टोज पृ० २१२ तथा यम्र० मौर मानै--मम० क° इटाडकगन ।४ मुनि जिन विजय--ह्रिमद्राचायस्य समय निणय ॥ ५ विशतिविधिका-प्रस्तावना




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now