शान्तकुटी-वैदिकग्रंथमाला भाग-8 | The Shantakuti Vedic Series Volume-viii

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The Shantakuti Vedic Series Volume-viii by विश्व बंधु - Vishwa Bandhu

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(क) क्षेपः ष -------------------------------------------------- ~~ वौश्रौ. = वौधायन-श्नोतसूत्र-, सेपा. विनलेम केलएड (21907, पषए.), 1. कलिकाता, १९०४०१९०७११९१३ ই. सूकरो. (भवत्रातमाष्य-युत-) 1 दौश्रौप्र.» = चौधायन-श्रौतप्रवर-, सपा. विलेम कैलरुड (०12०4, पए), 81 , कलिक्ाता, १९१३ ई भाय. ८ भारद्वाज-गृहमसूत्र-, संपा. एच. जे. डब्ह्यू, सालोमोंस (62100005, प्र, 1.प५.), साईडन (0595067) १९१३ ई. । भाण्डा. ` = पाणिनीयसुन्रपाद-तत्परिदिष्टग्न्य-, संपा. श्रीधरसासिन्‌-सिद्धिश्वरशचिन्‌, ৪0. पूता? १९३५ ई. । भाशि. = भारद्राज-दिक्षा-, संपा. नगेशवरवृत्ति-समेता-, रामचन्दर-खदशन श्रय्यर-, 50 पधि. पूना, १९३८ ई. । भाशो. ८ भारद्वाज-श्रौतसूत्र- (अपूरी-), संपा. रघुतीर-, [95., लाहौर, १९३५ ई.। भास्‌. ८ भाषिक-सूत्र- (शुप्रा, उपहित-), संपा, युगलकरिशोर-, 855., वनारत्त, १८८३ ই मास. ८ मानव-गृहासूत्र-, संपा. अश्टावक्रव्याख्या-समेत-, रामक्ृष्ण हर्षाजे-, गायकवाड-ग्रन्थमाला-, बड़ोदा, १५९२६ ई 1 संपा. एर्‌. क्नाविर (ण्व, ए.) सेंट पीटसैवगै (5६. एनलपछधाद), १८९७ इ, । মাহি, ८ माण्डूकी-शिक्षा-, सपा, भगवदूत्त-, दमग्र., लाहौर, १९२१ ई. । माश्रौ. = मानव-्नौतसूत्र-, संपा. एर्‌. क्नाविर्‌ (दपा, ए\), सेट पीटसंवगे (51, एलला.ञण), १९०० ६.४ भीस्‌. = मीमांसा-सूत्र-, सपा. रामेश्वरस्रिद्त्ति-समेत-, नित्यानन्द्शर्मन-, काशी, १९५६ वि, । ----- संपा. शबरस्वाधिभाष्य-समेत-, जीवानन्द्विय्ासागर-, कलिकाता, १८८३ ई, । “-- सपा, कुमारिलसइकृत-खछोकवार्तिक-तन्त्रवारतिक-टुप्णीका + शवरभाध्य-समेत-, गणेशशास्त्रिन-, आन... १९३० ई.। ---- संपा. इंग्लिश-अनुवाद-समेत-, वी. डी, बसु-, 5०७८०४९०१ 23001९5 ० ६9७ प्राए्े0४५७, रणाहिवाद, +. ५ ५ १९२३ ६.। , ' # “+-- इईंग्लिश-अनुवाद-, गज्ञानाथ झा-, गायकवाड़-प्राच्यग्रन्थमाला-, बड़ोदा, १९३३ ই, मेज. = ने्ायणीया-छन्दोनुक्रमणिका~, संपा. रघुवीर- 1745 170. 547-5531, १९३२ ई. । - या. ८ यास्‍्कीय-निरुक्त-, सपा, लक्ष्मशसरूप-, पत्वनदीयविश्वविद्यालय-, लाहौर, १९२७ ई. । संपा, दुगेबृत्ति-युत-, एच्‌. एप्‌. भडरककए-, 38728. यव, १९१८ ई. । ---- संपा. स्कन्दमा्रवरभाष्य-युत- (९ अध्या.], स्कन्दस्वामिसाप्य-समेत- [२-१२ अध्या.], लक्ष्मणसरूप-, , , पृश्वनदीयविश्चविदाख्य-, लाहौर, १९२८ ई. । ; >-++-+- सँपा. दुर्गइनत्ति-युत-, शिवदत्तश्मन्‌-, वेंकटेश्वरप्रेस, सुबई, १९८२ वि. । ; . ---- संपा. वे..का. राजवाड-, 507२1. पूना, १९४० ई. । “77 सपा. सराठी-अचुवाद-समेत-, वे. का. राजवाडे-इचलकरजीग्रन्थमाला-, पूना, १९३५ ई इंग्लिश-अनुवाद-, लक्ष्मणसरूप-, आक्सफो्ड ((0),०:१), १९२१ याशि. = याक्तवस्क्य-शिक्षा-, संपा. शिक्षावह्ली-विवृत्ति-समेता-, अमरनाथराच्चिय्‌-, काशी, १९९४ वि, । लाशो. = कारयायन-श्रोतसूत्र-, सपा, श्रम्निस्वाभिभाष्योपेत-, श्रानन्दच , 81., कलिकाता, १८७२ ६.। ` ० (१,२ प्पा.] संपा, स्वकीयवृत्ति-समेत-, मुकुन्दफा-, चौस., चनारस, १५३३ ई.। वाद. ,८ वाराह-गृह्मसूत्र-, सैपां. रघुवीर-, पश्चन॒दीयविश्वविद्यालय-प्रन्थमाला-, लाहौर, १९३२ ३. । ২ ০২১) (৫) नवौशौ, इश्तमा.प्रश्न,,स च-खण्ड-पढ़िक्त-संख्याहयेन संकेतितः,। ॥ 1 . (8) श्छोक-सेख्यया संकेत: - 8




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