हिन्दी जैन शिक्षा भाग - 4 | Hindi Jain Shiksha Bhag - 4
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
331 KB
कुल पष्ठ :
34
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)হয]२ राग रहित अर्थात् ख्री आदि फे साथ फाम क्रोड़ा
कुतृहलादि से रहित निर्विकार स्वरूप, तथा पुत्र कलत्रादि:
के मम से रहित हो । >: ., . “३ देप रहित अर्थात् वलवार, -दुप्. व्रिशूल,
भाला श्रादि शस््न- शस्त संहारक चिन्होंते रहित, शांत
मुद्रा वाला हो वहीं झदेव हैं। इससे विपरीत स्त्री श-
स्वादि फे धारण फरने वाले छदेव नदीं कद्दाते ।४ सुदेव अशदश दूपणों से * मुक्त और द्वादश{शणो से युक्त जो हो बह घदेष है । छुदेवफे खरूप का
निश्वय, चरित्र और मूर्ति द्वारा हो सकता है 1ক হল দুয়া! के नाम्--दानांवतराय १ लामांसराय ५
भोगांतराय ३ उपमोपांतराय ४ वीर्यान्तराय ४ द्वास रवि
७ अरति ८ भय & झग्ुप्सा [ घृणा ) १० शोक ११ काम १२
मिथ्यात्त्त १३ अज्ञान १४ निद्रा १५ अविरति १६ राग १७
द्वीप হল४ $ ११ गुणों कै नाम--अशोच् दत्त १ छुरमप्रुष्पचुक्ष २ दिव्य
शनि हे घामर 9 आसम( सिंदोसन ) ५ भामएडल ६ दुंदुमि
७.धन्त्रय ८ शानातिशय & घचवात्तिशय १० पूजातिशय ११
अआअपायापगम अतिणय (अदं परर तीर्थकर भगवान विरते
यद्य पर महामारी दष्कोल दि उपद्यों का न दोना ) १२
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