आधुनिक भारतीय शासन | Aadhunik Bharateey Shasan

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Aadhunik Bharateey Shasan by गोरखनाथ चोबे - Gorakhnath Chobey

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तीसरे संस्करण की भूमिका भारतीय शासन के पठन-पाठन खी जिज्ञासा लोगों में कितनी बढ रही है, इसका अनुमान लेखक पुस्तक के संस्करणों से करता है। आधुनिक भारतीय शासन' का दूसरा संस्करण एक वष में ही समाप्त हो गया | इस तीसरे संस्करण में केवल इतना संशोधन किया गया है कि सब बातें सामयिक कर दी गई हैं। १६४६ तक की भारतीय राजनीति की जानकारी विद्यार्थी अच्छी तरह कर सकते हैं । ऐसे समय में जब कि भारतीय शासन-विधान हर पहलू से डाँवा-डेल है और कोई बात निश्चित नहीं है. शासन की ठोप्त व्याख्या सर्वथा असम्भव है। संघ-शासन की बुनियाद क्या है इसका स्पष्ट उत्तर 'विधान-सम्मेलन! कीं सफलता पर निभेर है । तव तक. विद्यार्थी इसी शासन-विधान की रूप-रेखा का अध्ययन करे। राजनीतिक उथल-पुथज्न शासन-विधान पर क्या असर डालती है-- इस कठिनाई को लेखक भलीभाँति महसूस करते हैं | यही बजह है कि भारतीय शासन-विधान कोई स्थाई रूप नहीं रखता । महिला-शिक्षा-परिषद्‌ इलाहाबाद गोरखनाथ चोबे अगस्त १६४६ इं०




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