रत्नसार | Ratnsaar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ন্‌ ६9 ९५ ९६९७ ५८९५.1 विषयानुक्रमणिका ॥ (९)विषय प्रष्ठ समखूपैछे कि विषम स्पै? ६२्‌ सिद्ध ने जीव कहिये ते कुण हेतु ? क्र4 कर्मं मध्ये ठेदया किह कर्मं मध्ये ?वीस विहरमान जिन तथा जधन्य काले केतला तीर्थकर होइ ? ६३ चक्रवाि नँ १४ रतन किहा ऊपजे ? ६७ नव निधान किहा प्रगटे !पभु जिहा पारणो करें तिहा केतली वृष्टि होइ १चउद्‌ विद्या ना नामपच प्रस्थाने आत्मा ते पंच्रस्थान कहा?चीजु गुण रथान चटता पडता किम्‌ आये ?६२9११०० समोदया असमेोहिया मरण तेने




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