अथ संस्करविधिः | Ath Sanskarvidhi

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Ath Sanskarvidhi by श्री मद्यनन्द सरस्वती - Shri Madyanand Saraswati

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ब 77“ > स्वस्तिदाचनम्‌ $६- ~ मित्रं वर्णं सातये भगं यावांएथिवी मरुत॑ः स्वस्त- यँ ॥ १५ ॥ सुत्रामाणं एथिवीं याम॑नेदसं सुशमी गामदितिं सुप्रणीतिम्‌ । देवीं नाव स्वस्त्रिमनांग- समस॑वन्तीमा रुहेमा स्वस्तय ॥ १६ ॥ विश्व यज- মলা अपिं वोचतोतये आयंध्वं नो दुरेवाया च्रमिहुतं। सत्यया वो देवदूत्पा हुवेम शृरवतो दैवा अव॑से स्व- स्‍्तयें ॥१७ ॥ अपामीवामप विश्वामनांहुतिमपारातिं दुविद्नामघाय॒तः । अरे देंदा द्ेषों अस्मर्युयोतनोरु- गाः श्म यच्छता स्वस्तमे ॥ १८ ॥ अरिष्टः त मतो विरव॑ एधते पर प्रनाभिर्जायते धरमैणस्परि । यमांदि- त्यासोनय॑था सुनीतिभिरति विश्वानिदुश्ति स्व॒स्त- ये ॥ १९॥ य देवासोऽवथ वाज॑सातौ य शूर॑साता मरुतो हि ते धने । परातर्यावौणं रथ॑मिन्व सानसिम- रिध्यन्तमा र्हेमा स्वस्तये ॥ २० ॥ स्वस्ति नः प- হাল অন্ধ स्वस्त्यःप्सु वृजने स्ववाति । स्वास्त न: पन्नक्रयेषु योनिषु स्वस्ति राये मरुता दधातन॥२९॥ स्वस्ति रिद प्रप॑ये श्रेष्ठा रकण स्वल्यामि या कामम तिं। सा नो अमा सो अरंगो नि पातु स्वावज्ञा भ वतु देवगोपा ॥ २२ ॥ ऋ० म १० सु० ६३ ॥তি বীজ त्वां वायवंस्थ देवा वः सविता प्रापयतु




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