कथकलि नृत्यकला अविनाश | Kathakali Nrutyakala

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Kathakali Nrutyakala  by अविनाश चन्द्र - Avinash Chandraजय सिंह - Jay Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कथकलि नृत्यकला १५ विभाग द्वारा प्रकाशित पत्रों से संकलित की गई है। कुछ श्रन्य सम- कालीन ग्रंथों से भी सहायता ली गई है। कथकली कला के अपने ज्ञान से मैने केवल संकलित सामग्री को उपयोगी बनाने का का कायें किया है। मै उन महानुभावो का कृतज्ञ हूं, जिन्होंने मुझे इस पुस्तक की रचना में सहायता दी है। ट्रावनकोर के पुरातत्व विभाग के शप्रध्यक्ष श्री आर. पी. पोड्वल का में विशेष रूप से आभार मानता हुं, जिन्होने विभागीय पाण्डुलिपियों तथा प्रकाशनों के उपयोग की भ्रनुमति देकर मेरे कार्य को काफी हलका कर दिया। मेरे निजी सहायक श्री प्रब्दुल रहमान ग़जनवी ने भी पुस्तक के लिये सामग्री जुटाने में कम परिश्रम नहीं किया । पुस्तक की पांडुलिपि पढ़ने के लिये में अपने शिक्षक, लखनऊ के डा० डी. पन्त पी. एेच. डी. का भी ग्राभारी हूं। पुस्तक मे यत्र-तत्र दिये गये चित्रौ काश्रेय मेरे छोटे भाई श्री संतोषचंद्र पाण्डे भ्रौर सतीशचन्द्र पाण्डे को है। 'कथकलि बरत्य~ग्रम्यासः नामक ग्रध्याय में श्री उदयशंकर ने “जीवन का क्रम नामक अपने स्कं का समावेश कर लेने को ग्रनुमति दे मुझे श्रनुग्रहीत किया है। में धर्मंपुर रियासत के राजकुमार श्री प्रभातदेव जी राणा, श्री राजेन्द्रशंकधर व श्री ए. एस. भटनागर का भी कृतज्ञ हूं, जिन्होंने मुझे प्रत्यक्ष एवं परोक्ष सहायता दी । ट्रावनकोर के दरबारी नतंक श्री गोपीनाथ ने पुस्तक की भूमिका लिखकर मुझ पर विशद्येष कृपा की है । मुभे आ्राशा ही नहीं, पूरा विश्वास है कि स्वयं कथकलि के सर्वोत्तम कलाकार होने के नाते वे सदा कला के लिये इसी प्रकार कुछ न कुछ करते रहेंगे ।




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