नेहरू और भारतीय राजनीति | 1157 Nehru Or Bhartiya Rajneeti

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1157 Nehru Or Bhartiya Rajneeti by अ. अ. अनन्त - A. A. Anantप्रमोद कुमार अग्रवाल - Promod Kumar Agarwal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १४ )ईै-.कभी कंपे.पर चढ़ाते हैं, ओर कभी एक को सवार बनाकर स्वयं चोढा वन जाते है ।- वने महान्‌ व्यक्ति का, यही शोय सा पारिवारिक जीवन है |सात !४ > 3६उनसे वात करना श्या उनके दशंन मात्र से दृदय प्रसन्न हो जाता है। वे कभी-कभी भूल से जाते हैं. कि उनपर इतने बड़े देश का इतना महान्‌ उत्तरदायित्व है। उस समय वे बच्चो” से भी सरल मालूम होते है । उनकी मुस्कुराहट से वस उनकी श्रोर प्रत्येक व्यक्ति आकर्षित हो जाता है।श्राठ 1 ४९ চট 9लेखक हैं और कविताओं से प्रेम करते हैं| अंग्रेजी साहित्याकाश के चमकते हुए नक्षत्र हैं। कई महान ग्रंथों के प्रणेत | उनकी लेखनी में ओज है, और है विचारों का अ्न्तदन्द् | उनके विपय मे मैडम च्याड्रकाई शेक ने लिखा है कि जब उनका राजनीतिक कार्य समात होगा तो वे हे की भॉति जीवित रहेगे | ॥| | नपत्तियों, फूलो और पव॑तों, भरनों और हिम प्रदेशों से विशेष प्रेम, परन्तु अपने प्रिय स्थानों को देखने का अवकाश नही है। कमी-कर्मी उठास और अंतस की गहराइयों का अनुभव करने बाले |द्स |>४ २६ ४लियो श्राकृति पर विशेष श्राकृट होती हैं; क्योकि उनके रूप के अलावा उनकी हँसती हुई आँखों मे एक अजीब आकपण है। कोई-कोई




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