श्री भागवत दर्शन भागवती कथा भाग - 16 | Shri Bhagawat Darshan Bhagavati Katha Bhag - 16

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Shri Bhagawat Darshan Bhagavati Katha Bhag - 16 by श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी - Shri Prabhudutt Brahmachari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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यमदूतों का ओर विष्णु-पार्षदों का सम्बांद € হুড ) युयं वै धर्मराजस्य यदि निर्देशकारिणः घ्र तथमस्य नस्तखं यचच धमेस्य लकणम्‌ ॥ वेद्परणिदितो धमौ द्यधमस्तदुविपययः वेदो नारायणः साक्ास्स्वयंभूरिति शुश्रुम ॥& (श्रीभा ६ स्क० १९ श्र० ३८, ४० श्लो० ) ( सुनि नारायर्‌ नाम विष्णु पार्षद तहं आये। यमदूतनिकर पकरि मदात्तं मारि गिराये ॥ डरिक पूछे दूत--कौन हम हम भगाद्रो । मोल भाव जिनु किये तड़ातड मार लगाशथों ॥ घमेराज के दूत हम, पापीकूँ लैजात 1 फरघो न हम अपराध क्छु, कादे आपु फिस्पात हैं ॥ जप दो राजाओं के कमचारो मिलते है, तो जो बड़े राजा के चली भोर प्रभावशाली क्म्त्चारी द्वोते हैं, ये छोटे मंडलीक राजा भ्रीशुकदेवजी कहते हें--“राजन | विष्युदूतों ने यमदूतों से पूछा- तेम शलोग यदि यथार्थं मे धमरन के निर्देश के अनुसार काय- फरने बाले हो, तो हुम बताओ धमं किनि कहते हैं ? घर्म का तत्व क्या है !” इस पर यमदूत बोले--'थजी, चेद में जो करंब्य वाया है वी




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