श्री ज्ञान पंचमी | Shri Gyan Panchmi

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Shri Gyan Panchmi by कुँवरजी आनंद जी भावनगर - Kuwarji Aanandji Bhavnagar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(७) डानी शाश कुमार्ग বানা অহন না শ্বাস घोडाने सन्परर्गे छ३ जाय छे, तेज प्रमागे ज्ञान पण * आम ? नामना राजाने, € উস? राजाने तथा ' यव › नामना इषे बिंगेरेने सन्‍्मार्ग टट जनार यु छे, ” श्रतज्ञानतु आरायन करयाथी “पृथ्वीपाछ” राजानी উন উল भवमां केबरछज्ञान पण सुलभ थाय छे तेनी कथा नीचे प्रमणे- > १३ पृथ्वापाठ सजानी कथा, & पृथ्वीपुर ” नामना नगरमा समग्र पदार्थोरी परीक्षा करवामा पिचक्षण अने ताप्काटिक उुद्धिवाकों ४ पृथ्वीपाल ” नामे पृथ्वीपाति (राना) दमे ५ धी इनी भात्ति अने अधर्मथी अनिए्टनी प्राप्त थाय छे ” आ সনাজীনা হালা षक्यनो स्रा चदा दनां सवाद देवाथा ते राजनि शास्त्रों उपर चहुमान नहींतु कारण के ते राजा पेटलाएक परुण्यवत्र मनुप्योने निरतर दारिद्र अने आधे व्या- पिवी दुम्खी यटा जोषि हतों, तथा केटआाएक पुण्यराहेत महुष्योने सामरा्यषठसने भोगवता जोतो हतो, ते चतुर राजा एकदा (হি) नगस्चचो जेचान गुप्त बेप धारण करी फरतो फरतो कोई विद्यामठ पासे आव्यी, त्यां টা प्रमे वोडातो एक उज्वल यशनी जेवो चेक साभन्यो-- ৫৫ ও. सर्वेत्र सुप्रिया सन्‍्त« ঘনুল ভাবিবীওঘদা । 4 ऐ $ ५४ ॐ सर्वत्र নিলা दुख, सर्वच सुखिनां सुखम्‌ ॥९॥ | सतप भ ध কি স্ব সি অধ सत्युर॒पों सदेश्न अति प्रिय होय छे, अधम पुरुष




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