सरल-नाटक-माला | Saral-naatak-mala

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Saral-naatak-mala by नर्मदाप्रसाद मिश्र - Narmdaprasad Mishr

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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৯1৬২২৬৬৬২৬৬৬২/২৬:৬২৬২২/২৬/২৬২২/% ~^ ~ ~ भरोसे की भस पडा व्यानी ५ __ | 4 44.74. 499 पाच्च- १ জিনতা २--भों चक्कानन्द शास्त्री হাল रास्ता ८$& ६७. ६9 प्रशेश पहला । चित्तदालई--[ स्वगत ) क्या करू ? कहाँ जाऊं ? किसका अपना दःख सनाऊ ? एक आपत्ति हो तो उससे बच भी सकता हैं। यहाँ तो एक पर एक ग्यारह हो रही है । इन्हीस तो पिश्ड छूटा, यह और एक अचानक आ टूटी । इस समय मेरी दशा ठीक वेसी हो रही है जेसी राम-वनवास के समय भरत- जी की थी :-- ग्रह-ग्रहीत पुनि बात-वश, तेहि पुनि बीछी-पम्लार । ताह ए्रयाइय बारुणा, কই চলল उपकार ॥ हा राम | कया कर ? कुछ भी हो; जो भाग्य में बदा है उसे तो २० ৮




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