नमूने का गाँव और मिट्टी के सुखदायक घर | Namune Ka Ganv Aur Mitti Ke Sukhadayak Ghar

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Namune Ka Ganv Aur Mitti Ke Sukhadayak Ghar by एक जानकार - Ek Janakar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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চিপ 4 बहुत बडी ज़िम्मेदारी है, जिसे हम अपना सुख-दुःख सोप जायेंगे। हमें मुनासिब है कि हम अपने हाथों अपनी हालत ठीक कर जायें, ताकि श्रगली पीढ़ी हमारी सुस्ती, लापरवाही और अज्ञान पर तरस न खाये और न दुनिया की उदी इई कोमों के सामने हमारे किये ह लना से सिर छुकाये । इसलिये गोचवालौ को श्रापस मे सला करके, एकमत होकर और एक दूसरे को मदद पहुँचाकर; अपने गाँव को ढीक-ठीक बसा लेना चाहिये । हरएक घर और हरएक गाँव को सरकार कहाँ तक मदद पहुँचा सकती है ? इससे हमें अपना वोऋ अपने ही कंधों पर उठा लेना चाहिये । सुधार का तरीका प्र गोष का उजाडना श्रौर बसाना क्या सहज काम है १ ददती अडचन तो यही है कि लोग अपना पुराना घर छोड़ेंगे केसे ? इसके लिये उनको समझाने की ज़रूरत है। जब लोग अपना लाभ समस्त जायेंगे, तब पुराने गाँव और घर को छोडने में उन्हें आगा पीछा न होगा । अगर गाँव घना बसा हो तो कुछ लोगों को उसमे से निकालकर उनका एक गाँव अलग बसा दिया जाय । उनके बसने मे जो चं पटे, उसे गाँव के बाक़नी लोग चन्दा करके दें; क्योंकि उनके आराम के लिये हो कुछ लोग अपने बाप-दादों का घर छोडेंगे। सरकार ने यौँव-सुधार के लिये कई महकमे खोल रक्‍खे हैं, गाँव के लोगों को उन महकमों से सी सलाह ओर मदद लेनी चाहिये । अगर किसी गाँव के लोग पसन्द करते हों, लेखा उन्हें करना ही चाहिये, कि उनका कुल का कुल गाँव नये सिरे से बसा दिया जाय, तो उन्हे पहले सरकार के सानने अपनी इच्छा ज़ाहिर करनी चाहिये; और




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