मन मयूर | Man Mayur

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Book Image : मन मयूर  - Man Mayur
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मन-मयूरউস সি পচ রন লোক পথ্য भ कु ०५ ०५५००४७ জি সি পাস জপ পপ ই জি অর্ধ পলা পাপা সপ লো সি পি সস লন পপি ০০ মিসস সি ইসিनसमभें, रवइको रबड़ीका पुल्लिंग न समभें, और भावजकों अगर भाभी पुकारते हों तो बड़े भाईको भाभा न पुकारें ।मेरी इन वातोंकों पढ़ कर मुझे कोई बौडम पुकारे तो में उसे क्षमा कर दूँगा, जैसे सूथ्य उन लोगोंको क्षमा कर देता है जो उसे पतंग पुकारते हैं ।मेरा घरेलू जीवन इस प्रथमे बड़ा सुखमयहै कि घरकी मालकिन महोदया मुभे काठ-कबाड समभ कर अधिक छेडती नहीं । हाँ, यह ज़रूर है कि मेरा पति- परमेरवर-पन वे बहुत पनपने नहीं देतीं ।पर इसका यह अर्थ नहीं कि हम-दोकी दुूनियामें कहीं कोई दरार है। जीवनकी एकरसताको दूर करने के लिए कभी काई भडप हो जाय--वह दूसरी बात है। यों हम दोनों, गणित को व्यर्थ करते हुए, १+ १-१ ही हैं ।आठ |




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