विप्रदास | Vipradas

Vipradas  by विप्रदास Vipradas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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९० विप्रदास साथ जाना पड़ा | और मजेकी बात यह कि माने उस दिन साफ-साफ था कि मुझ-जेसे स्लेच्छाचारीके साथ वे वैकुण्ठ जनिको भी राजी नहीं ১ कहते हैं माग्यका परिहास, कर्यो भामी १२ বং उल्ाहनेका जवाब বা चुप रही | छ्गा-- खैर, कुछ भी हो, तुम्हाया हुक्म न टाढूँगा भाभी,- उन्हें निश्चिन्‍्त रहनेको कह देना |? सती हँस दी, बोली--“ मुझे मेजके वे निश्चिन्त ही हैं| कमरेसे बाहर निकलते ही तुम्हारे माई साहवकी वात मेरे कानों पड़ी, वे जोरके साथ मासे कह रहे थे, अब वेधड़क यात्राकी तैयारियाँ करो मा, जिन्हें दौत्य-कार्यमें नियुक्त किया गया है उनके सामने भश्याजीका तर्क नहीं चलनेका | गरदन झुकाकर मेजूर कर लेगा, तुम देख लेना |? | सुनकर द्विजदास मारे क्रोधके क्षणमर सन्न रहकर बोला--“ नामंजूर नहीं कैर सकता, यह जानकर ही अगर उन छोगोंने यह षड्यंत्र रचा हो कि ख्ियोंके मनमें वेमतल्वकी उठनेवाली किसी रहरको चरितार्थ करनेका वाहन मुझे ही




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